यहाँ पर भोलेनाथ अपने भक्तो को बचाने के लिए झेल लेते है बिजली को अपने ऊपर …

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में कुल्लू से लगभग २९ की मी दूर चंसारी  गाँव के पास बिजली  स्थित है यहाँ पहुँचने के लिए आपको लगभग चार से पांच की मी पैदल चलकर जाना होगा तभी आप पहुंचेंगे एक अद्भुत मंदिर पर जिसका नाम बिजली महादेव के नाम से प्रसिद्ध है |

 

पूरी कुल्लू घाटी ऐसा मानती है की  यह घाटी एक विशालकाय सांप का रूप है और इस सांप का वध भगवान शिव ने किया था। जिस स्थान पर मंदिर है ठीक वहां शिवलिंग पर हर बारह साल में भयंकर आकाशीय बिजली गिरती है। बिजली गिरने से मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है। खंडित शिवलिंग के टुकड़े एकत्रित कर यहाँ के पुजारी इसे मक्खन के साथ इसे जोड़ देते हैं और कुछ ही माह बाद शिवलिंग एक ठोस रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। इस शिवलिंग पर हर बारह साल में बिजली क्यों गिरती है और इस जगह का नाम कुल्लू कैसे पड़ा इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो इस प्रकार है।

कुल्लू घाटी के लोग बताते हैं कि बहुत पहले यहां कुलान्त नामक दैत्य रहता था। दैत्य अजगर का रूप धारण कर कुण्डली मार कर ब्यास नदी के प्रवाह को रोक कर इस जगह को पानी में डुबोना चाहता था। इसके पीछे उसका उद्देश्य यह था कि यहां रहने वाले सभी जीवजंतु पानी में डूब कर मर जाएंगे। भगवान शिव कुलान्त के इस विचार से से चिंतित हो गए।

बड़े प्रयत्न  के बाद भगवान शिव ने कुलान्त के सिर पर त्रिशूल से वार कर दिया। त्रिशूल के प्रहार से कुलान्त मारा गया। कुलान्त के मरते ही उसका शरीर एक विशाल पर्वत में बदल गया। उसका शरीर धरती के जितने हिस्से में फैला हुआ था वह पूरा की पूरा क्षेत्र पर्वत में बदल गया। कुल्लू घाटी का बिजली महादेव से रोहतांग दर्रा और उधर मंडी के घोग्घरधार तक की घाटी कुलान्त के शरीर से निर्मित मानी जाती है। कुलान्त से ही कुलूत और इसके बाद कुल्लू नाम के पीछे यही किवदंती कही जाती है।

कुलान्त दैत्य के मारने के बाद शिव ने इंद्र से कहा कि वे बारह साल में एक बार इस जगह पर बिजली गिराया करें लेकिन जब बिजली गिरे तो जन धन को इससे नुकसान ना पहुंचे इसलिए भोलेनाथ लोगों को बचाने के लिए इस बिजली को अपने ऊपर गिरवाते हैं। इसी वजह से भगवान शिव को यहां बिजली महादेव कहा जाता है। । हर बारहवें साल में यहां आकाशीय बिजली गिरती है।

कुल्लू में भी महादेव प्रिय देवता हैं। कहीं वे सयाली महादेव हैं तो कहीं ब्राणी महादेव। कहीं वे जुवाणी महादेव हैं तो कहीं बिजली महादेव। बिजली महादेव का अपना ही महात्म्य व इतिहास है। ऐसा लगता है कि बिजली महादेव के इर्द-गिर्द समूचा कुल्लू का इतिहास घूमता है। हर मौसम में दूर-दूर से लोग बिजली महादेव के दर्शन करने आते हैं।