कई विशेषताएं लिए बाबा भोलेनाथ का मंदिर जो आज भी है अधूरा, जानिए क्यों है मंदिर इतना ख़ास…!!!

शिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव और माँ पार्वती को अत्यंत प्रिय है। इस पर्व के दौरान  भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा की जाती है।वैसे तो दुनियाभर में शिव जी के कई भव्य और चमत्कारी मंदिर हैं,जिनकी अलग अलग कहानियां है और जिनसे शिव भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी है, लेकिन आज शिवरात्रि के मौके पर हम आपको ऐसे एक शिव मंदिर

भगवान शिव का भोजेश्वर मंदिर
भगवान शिव का भोजेश्वर मंदिर

के बारे में बताने जा रहे ही जिसके बारे में पढ़कर आपको हैरानी तो होगी ही साथ ही महादेव की इस लीला पर अचम्भा भी होगा ।तो आइये जानते है इस अद्भुत मंदिर के बारे में जो कि एक शर्त के चलते आज तक अधूरा है।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 32 कि.मी. की दूरी पर भोजपुर है। वहीं पर स्थित है भगवान शिव का भोजेश्वर मंदिर। इस मंदिर की छत न बनी होने के कारण यह मंदिर अधूरा ही रह गया है इस मंदिर की विशेषता इसका अधूरा निर्माण हैं।  इसका निर्माण अधूरा क्यों रखा गया इस बात पर ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर एक ही रात में निर्मित होना था परन्तु छत का काम पूरा होने के पहले ही सुबह हो गई, इसलिए काम अधूरा रह गया।

भोजेश्वर मंदिर
भोजेश्वर मंदिर

इस मंदिर की कई विशेषताएं है आइये जानते है उनके बारे में:

  • इस मंदिर कि पहली विशेषता इसका विशाल शिवलिंग हैं जो कि विश्व का एक ही पत्थर से निर्मित सबसे बड़ा शिवलिंग हैं।  सम्पूर्ण शिवलिंग कि लम्बाई 5.5 मीटर  (18 फीट ), व्यास 2.3 मीटर (7.5 फीट ), तथा केवल लिंग कि लम्बाई 3.85 मीटर (12 फीट ) है।
मंदिर स्थित विशाल शिवलिंग
मंदिर स्थित विशाल शिवलिंग
  • भोजेश्वर मंदिर  के पीछे के भाग में बना ढलान है, जिसका उपयोग निर्माणाधीन मंदिर के समय विशाल पत्थरों को ढोने  के लिए किया गया था। पूरे विश्व में कहीं भी अवयवों को संरचना के ऊपर तक पहुंचाने के लिए ऐसी प्राचीन भव्य निर्माण तकनीक उपलब्ध नहीं है। ये एक प्रमाण के तौर पर है, जिससे ये रहस्य खुल गया कि आखिर कैसे 70 टन भार वाले विशाल पत्थरों का मंदिर क शीर्ष तक पहुचाया गया।
भोजेश्वर मंदिर कि गुम्बदाकार छत
भोजेश्वर मंदिर कि गुम्बदाकार छत
  • भोजेश्वर मंदिर कि गुम्बदाकार छत हैं। चुकी इस मंदिर का निर्माण भारत में इस्लाम के आगमन के पहले हुआ था अतः इस  मंदिर के गर्भगृह के ऊपर बनी अधूरी गुम्बदाकार छत भारत में ही गुम्बद निर्माण के प्रचलन को प्रमाणित करती है। भले ही उनके निर्माण की तकनीक भिन्न हो। कुछ विद्धान इसे भारत में सबसे पहले गुम्बदीय छत वाली इमारत मानते हैं। इस मंदिर का दरवाजा भी किसी हिंदू इमारत के दरवाजों में सबसे बड़ा है।
गर्भगृह की अधूरी बनी छत
गर्भगृह की अधूरी बनी छत
  • इस मंदिर की अन्य विशेषता यह है की इसके 40 फीट ऊचाई वाले इसके चार स्तम्भ हैं। गर्भगृह की अधूरी बनी छत इन्हीं चार स्तंभों पर टिकी है।
  • इस मंदिर की एक और विशेषता यह है कि इसके अतिरिक्त भूविन्यास, सतम्भ, शिखर , कलश और चट्टानों की सतह पर आशुलेख की तरह उत्कीर्ण नहीं किए हुए हैं। भोजेश्वर मंदिर के विस्तृत चबूतरे पर ही मंदिर के अन्य हिस्सों, मंडप, महामंडप तथा अंतराल बनाने की योजना थी। ऐसा मंदिर के निकट के पत्थरों पर बने मंदिर- योजना से संबद्ध नक्शों से पता चलता है।

  • भोजपुर शिव मंदिर के बिलकुल सामने पश्चमी दिशा में एक गुफा हैं जो उनकी अर्धांगिनी माँ  पार्वती के नाम से जानी जाती हैं। इस गुफा में पुरातात्विक महत्तव कि अनेक मूर्तिया हैं।
भोजपुर शिव मंदिर
भोजपुर शिव मंदिर

इस प्रसिद्घ स्थल में वर्ष में दो बार वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है जो मकर संक्रांति व महाशिवरात्रि पर्व के समय होता है। इस धार्मिक उत्सव में भाग लेने के लिए दूर दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां तीन दिवसीय भोजपुर महोत्सव का भी आयोजन किया जाने लगा है।

 

॥ जय महाकाल ॥

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