क्या है भोलेनात ओर भांग के बीच संबंध? जानिए क्या सही है उन्हे भांग पीते हुए चित्रित करना???

भोले नाथ के साथ त्रिशूल, डमरू, चंदन, चंद्रमा, मृगछाल, विष और भांग का नाम अवश्य जुड़ता है।
मगर आपने कभी सोचा है कि भगवान और भांग के बीच क्या संबंध हो सकता है?
भांग भारत में कई सदियों से चली आ रही है। कुछ मान्यताओं के अनुसार भांग पांच पवित्र पौधों में से एक हैं और इस खुशी, सुख और आजादी को भी स्रोत माना जाता है।
दोनों के जुड़ाव में वैसे तो कई तर्क है। कुछ कहानियों पर आधारित हैं और कुछ लॉजिक के मॉडल पर बने हैं।?अगर आप दोनो को पचाने की हिम्मत रखते हैं, तो हम आपको दोनों बताएंगे।


पौराणिक कथाओ के आधार पर-
एक कहानी के अनुसार भगवान शिव का अपने परिवार से मतभेद हो गया और वो एक जंगल में चले गए। वहां वो जाकर भांग के पौधों के नजदीक सो गए। जागने पर उन्होंने कुछ पत्तों का सेवन किया, जिससे उन्हें काफी आनंद और ताजगी का अनुभव हुआ। इसलिए भांग को भोले नाथ के पसंदीदा भोग में स्थान दिया गया।
एक अन्य कथा यह भी है कि समुद्र मंथन के दौरान अमृत से पहले विष निकला, जिसे भगवान शंकर ने अपना भोग बनाया। विष पीने से उनकी स्थिति बिगड़ गयी और उसके प्रभाव को शांत करने के लिए भगवान शिव को भांग दी गई। इसके बाद से उनके साथ भांग का नाता जुड़ गया।

तर्क
भगवान शंकर को हिन्दू धर्म में संहारक की उपाधि दी गई है। मानवों के विज्ञान के आधार पर जब भी समाज में ठहराव आता है, तो भोले नाथ समाज को हिलाते हैं, ताकि परिवर्तन आता रहे और समाज एक पड़ाव पर स्थिर न हो। शिव का भूमिका महाकाल के साथ काल में भी अहम है