आज जानिए भगवान कार्तिकेय की माता..!!नवदुर्गा का कोनसा रूप है..!!!

आज जानिए भगवान कार्तिकेय की माता..!!नवदुर्गा का कोनसा रूप है..!!!

भगवान कार्तिकेय की माता-स्कन्दमाता
भगवान कार्तिकेय की माता-स्कन्दमाता

माँ दुर्गा का पांचवा रूप स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है। भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवे स्वरूप को स्कंद माता नाम प्राप्त हुआ है।भगवान भगवान् कार्तिकेय का एक और नाम स्कन्द है ।वे बालरूप में माता की गोद में बैठे हैं।इस देवी की चार भुजाएं हैं। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं।  ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है।  इनका वाहन सिंह है।

माँ स्कंदमाता सूर्यमंडल की  देवी हैं| इनकी उपासना करने से साधक अलौकिक तेज की प्राप्ति करता है | यह अलौकिक प्रभामंडल प्रतिक्षण उसके योगक्षेम का निर्वहन करता है| माँ स्कंदमाता की उपासना से भक्त की समस्त इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं। इस मृत्युलोक में ही उसे परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार स्वमेव सुलभ हो जाता है। स्कंदमाता की उपासना से बालरूप स्कंद भगवान की उपासना भी स्वमेव हो जाती है। यह विशेषता केवल इन्हीं को प्राप्त है, अतः साधक को स्कंदमाता की उपासना की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है।

॥ माँ स्कन्दमाता की जय ॥