स्वयं विघ्नहर्ता के विवाह में भी आया था विघ्न; पढ़िए फिर कैसे हुआ उनका विवाह..!!!

स्वयं विघ्नहर्ता के विवाह में भी आया था विघ्न; पढ़िए फिर कैसे हुआ उनका विवाह..!!!

गणेश जी का विवाह ऋद्धि और सिद्धि के साथ हुआ
गणेश जी का विवाह ऋद्धि और सिद्धि के साथ हुआ

प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा सभी भगवानों से पहले की जाती है| प्रत्येक शुभ कार्य करने से पहले इनकी पूजा की जाती है| लेकिन दो कारणों की वजह से गणेश जी का विवाह नहीं हो पा रहा था| उनसे कोई भी सुशील कन्या विवाह के लिए तैयार नहीं होती थी| पहला कारण उनका सिर हाथी वाला था और दूसरा कारण उनका एक दन्त| इसी कारणवश गणेशजी नाराज रहते थे| तो उन्होंने अन्य देवताओं के विवाह में बाधाएं डालना शुरू कर दिया|

इससे सारे देवता परेशान हो गए और शिवजी को जाकर अपनी गाथा सुनाने लगे| तो शिव-पार्वती ने उन्हें बोला कि इस समस्या का निवारण ब्रह्मा जी कर सकते है|

देवताओं के समाधान के लिए ब्रह्मा जी ने योग से दो कन्याएं ऋद्धि और सिद्धि प्रकट हुई|  दोनों पुत्रियों को लेकर ब्रह्माजी गणेशजी के पास पहुंचे और

बोले की आपको इन्हे शिक्षा देनी है| गणेशजी शिक्षा देने के लिए तैयार हो गए| जब भी चूहे द्वारा गणेश जी के पास किसी के विवाह की सूचना आती थी

तो ऋद्धि और सिद्धि उनका ध्यान भटकाने के लिए कोई न कोई प्रसंग छेड़ देतीं थी| ऐसा करने से हर विवाह बिना किसी बाधा के पूर्ण हो जाता था|

परन्तु एक दिन गणेश जी को सारी बात समझ में आई इससे पहले कि गणेश जी क्रोधित होते, ब्रह्मा जी उनके सामने ऋद्धि सिद्धि को लेकर प्रकट हुए

और बोलने लगे कि मुझे इनके लिए कोई योग्य वर नहीं मिल रहा है| कृपया आप इनसे विवाह कर लें|

इस प्रकार गणेश जी का विवाह बड़ी धूमधाम से ऋद्धि और सिद्धि के साथ हुआ और इसके बाद इन्हे दो पुत्रों की प्राप्ति हुई जिनका नाम था शुभ और लाभ|

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