आज के युग में शिव जी का साक्षात् चमत्कार एक शिवलिंग जो बड़ा हो रहा है ……

भारत की संस्कृति की अपनी  ताकत और  रही है। कभी अफगानी योद्धाओं ने तो कभी अंग्रेजी ताकतों ने, इस देश को सभी ने बर्बाद करने की पूरी कोशिश की किन्तु हमारा धर्म, हमारी संस्कृति और संस्कारों की वजह से ही भारत आज भी मौजूद है।

यूनानो-मिस्रो-रोमाँ सब मिट गए जहाँ से,
मगर कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।

आज पूरे विश्व में सनातन धर्म को आदर के भाव से देखा जाता है। धार्मिक चमत्कार तो इस देश में पग-पग पर देखे जा सकते हैं। तो आइये पढ़ते हैं ऐसे ही एक भगवान शिव जी के प्राकृतिक शिवलिंग के बारें में जिसकी लम्बाई हर साल 6 से 8 इंच बढ़ रही है।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मरौदा गांव में घने जंगलों बीच एक शिव भगवान का प्राकर्तिक शिवलिंग है जो की भूतेश्वर नाथ के नाम से प्रसिद्ध है। यह विश्व का सबसे बड़ा प्राकर्तिक शिवलिंग है। सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि यह शिवलिंग अपने आप बड़ा और मोटा होता जा रहा है। यह जमीन से लगभग 18 फीट ऊँचा एवं 20 फीट गोलाकार है। राजस्व विभाग द्वारा प्रतिवर्ष इसकी उचांई नापी जाती है जो लगातार 6 से 8 इंच बढ रही है। यहाँ आने वाले लोग शिव भगवान के साथ साथ इस शिवलिंग और नंदी की पूजा करते हैं।

 

इस शिवलिंग के पीछे की कहानी इस गाँव के लोग बताते हैं कि आज से सैकडो वर्ष पहले इस जगह पर एक जमींदार की खेती की जाती थी। खेत में जो टीला था अक्सर उससे शेर के दहाड़ने जैसी आवाजें आती थी जब इस बात को गाँव वालों को बताया गया तो सभी ने इस टीले से आने वाली आवाजों को सुना और धीरे-धीरे लोगों की भक्ति इस टीले के प्रति बढ़ने लगी। इस टीले को गाँव वाले शिवलिंग का रूप में मानने लगे। गांव के लोग बताते हैं कि पहले यह टीला छोटे रूप में था। धीरे-धीरे इसकी ऊंचाई एवं गोलाई बढ़ती गई। आज यह शिवलिंग 18 फीट ऊँचा और 20 फीट गोलाकार है। इस शिवलिंग में बढ़ोतरी आज भी जारी है।

बेशक आज का विज्ञान इस बात को अंधविश्वास कहे किन्तु यहाँ जाने वाले लोगों की आस्था अंधी नहीं है। सावन में तो इस शिवलिंग की पूजा करने के लिए घंटों इंतज़ार भी करना पड़ता है। आसपास के लोग बताते हैं कि यह शिवलिंग बेहद शक्तिशाली है और इसके दर्शन मात्र से शिव भगवान की कृपा प्राप्ति होती है और व्यक्ति के कई दुःख व तकलीफ खत्म हो जाते हैं। आज भूतेश्वर नाथ जी के दर्शनों के लिए पूरे भारत से भक्त और पर्यटक यहाँ आते हैं।