आज जानिये बद्रीनाथ एवं केदारनाथ से जुडी एक भविष्यवाणी!! सुनकर आप भी रह जाएंगे हैरान !!!

आज जानिये बद्रीनाथ एवं केदारनाथ से जुडी एक भविष्यवाणी!! सुनकर आप भी रह जाएंगे हैरान !!!

गंगा और भागीरथी को आने वाली गंगा नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक है यह मात्र एक जलस्त्रोत नहीं है बल्कि भारतीय मान्यताओं में यह नदी पूज्यनीय है। जिसे गंगा मां अथवा गंगा देवी के नाम से सम्मानित किया जाता है। मरने के बाद कुछ लोग गंगा में अपनी राख विसर्जित करना मोक्ष प्राप्ति के लिए आवश्यक समझते हैं। यहां तक कि कुछ लोग गंगा के किनारे ही प्राण विसर्जन या अंतिम संस्कार की इच्छा भी रखते हैं इसके घाटों पर लोग पूजा अर्चना करते हैं। और ध्यान लगाते हैं गंगा जल को पवित्र समझा जाता है तथा समस्त संस्कारों में उस का होना आवश्यक है पंचामृत में भी गंगाजल को एक अमृत माना गया है।


लेकिन आज जिस रफ्तार से इस धरती पर विकास हो रहा है उसमें प्राकृतिक संसाधनों की बहुत अनदेखी की जा रही है अगर ऐसा चलता रहा तो भविष्य में गंगा नदी पुणे स्वर्ग चली जाएगी फिर गंगा किनारे बसे तीर्थ स्थलों का कोई महत्व नहीं रहेगा ।और वह नाम मात्र ही तीर्थ स्थल रह जाएंगे।
केदारनाथ को जहां भगवान शंकर का आराम करने का स्थान माना गया है वही बद्रीनाथ विष्णु जी का वेकुंड कहा गया है जहां भगवान विष्णु शर्मा निद्रा में रहते हैं और 6 महा जागते हैं। पूरा देश गंगा का हत्यारा है मान्यताओं के अनुसार जब गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई तो यह 12 धाराओं में बट गई इस स्थान में मौजूद धारा अलकनंदा के नाम से विख्यात हुई और इस स्थान बद्रीनाथ भगवान विष्णु का वास बना।


अलकनंदा की यह चरणी नदी मंदाकिनी नदी के किनारे केदारघाटी है जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सबसे महत्वपूर्ण केदारेश्वर है। यह संपूर्ण इलाका रुद्रप्रयाग जिले का हिस्सा है रुद्रप्रयाग में भगवान रूद्र का अवतार हुआ था।लेकिन बारा धाराओं में से अब अलकनंदा और उसकी सहयोगी मंदाकिनी का ही अस्तित्व बचा हुआ है।नदी जिसे गंगा कहा जाता है लगातार हो रहे खनन जंगल कटाई और नदी किनारे बढ़ रही जनसंख्या और धार्मिक रिया कांड के चलते जहाज नदी का जलस्तर घटा है वह नदियां प्रदूषित भी हो गई है।


पुराणों के अनुसार स्वर्ग की नदी गंगा है और इस नदी को किसी प्रकार से प्रदूषित करने और उसके स्वभाविक रुप से छेड़खानी करने का परिणाम होगा संपूर्ण जम्मू खंड का विनाश और गंगा का पुनः स्वर्ग में चले जाना। वर्तमान में गंगा पूर्णता प्रदूषित हो गई है और इसके जल की गुणवत्ता में भी परिवर्तन होने लगा है।
भविष्यवाणी
माना जाता है जिस दिन नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे बद्रीनारायण अर्थ का मार्ग पूरी तरह से बंद हो जाएगा भक्त बद्रीनाथ के दर्शन नहीं कर पाएंगे।

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