जानिए किस कारण नहीं बना अमरनाथ धाम ज्योतिर्लिंग..?? जाने सारे रोचक राज़..!!!

अमरनाथ धाम की मान्यता है की जो भी व्यक्ति इस धाम में आता है, वह बाबा बर्फानी के दर्शन पाकर वह अपने सभी पापो एवं कष्टों से मुक्ति पा जाता है तथा व्यक्ति को शिव के पवित्र धाम की प्राप्ति हो जाती है.

परन्तु इतनी विशेषताओं एवं चमत्कारिक शक्तियों से परिपूर्ण होने के बावजूद इस पवित्र तीर्थस्थल को ज्योतिर्लिंग की मान्यता क्यों प्राप्त नहीं हुई.

अमरनाथ का पवित्र धाम एक ज्योतिर्लिंग नहीं है, आखिर ऐसा क्यों है इसे जानने से पहले आइये 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में. सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ॐकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्रयम्बकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर, घृष्णेश्वर.

इन सभी ज्योतिर्लिंगों में एक बात समान है जो अमरनाथ धाम से थोड़ा अलग है. अमरनाथ का शिवलिंग किसी भक्त की श्रद्धा एवं भक्ति से उतपन्न नहीं हुआ था.

अमरनाथ में भगवान शिव तथा माता पार्वती अपनी इच्छा अनुसार आये थे, तथा भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी. इसका प्रतीक अमरनाथ में स्थित हिमशिवलिंग है.

परन्तु सभी ज्योतिर्लिंगों की उत्तपति भक्तो की तपस्या से हुई, जैसे की सोमनाथ में स्थित ज्योतिलिंग की स्थापना चंद्र देव के कारण हुई थी.

केदारनाथ में भगवान विष्णु ने नरनारायण के रूप में भगवान शिव को प्रसन्न किया था. रामेश्वरम में प्रभु श्री राम की तपस्या से ज्योतिलिंग की स्थापना हुई.
इसके साथ ही दूसरी बात यह की सभी ज्योतिर्लिंग स्थायी है अर्थात वे एक स्थान में स्थिर रहते है परन्तु अमरनाथ की गुफा में बनने वाला हिमलिंग स्थायी नहीं है, यह हमेशा कायम नहीं रहता है. यह कुछ समय के लिए हिमलिंग के रूप में रहता है तथा इसके बाद विलीन हो जाता है.