पढ़िए बाली और सुग्रीव की माँ के बारे में,जो स्वयं वानर रूपी स्त्री थी..!!!

पढ़िए बाली और सुग्रीव की माँ के बारे में,जो स्वयं वानर रूपी स्त्री थी..!!!

रामायण में आपने बाली और सुग्रीव के बारे में सुना ही होगा । हम सभी जानते है कि दोनों शक्तिशाली वानर थे। बाली के बारे में कहा जाता है उनने विश्वविजेता रावण को अपनी भुजा में दबा कर सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा की थी। लेकिन क्या आप जानते है उनकी माता एक स्त्री रूपी वानर थी। आप यह जानकर अचंभित तो नहीं हो रहे हैं लेकिन यह सुच है । आइये पढ़ते है पूरी कथा:

ऋक्षराज नाम का एक बहुत ही शक्तिशाली वानर था। वह अपनी शक्ति की दंभ में इधर-उधर घूमता रहता था।वह ऋष्यमूक पर्वक के पास एक तालाब था। उस तालाब की यह विशेषता थी कि जो भी उस तालाब में स्नान करता है वह एक खूबसूरत स्त्री के रूप में परिवर्तित हो जाता है।एक दिन वह वानर उस तालाब में नहा कर वापस आया तो उसने देखा कि एक स्त्री के रूप में परिवर्तित हो गया। जब उसने खुद को उस रूप में देखा तो वह बहुत शर्मिदा

हुआ। जब देवराज इन्द्र ने उस स्त्री रूपी वानर को देखा तो उनका तेज उस स्त्री के बालों पर गिरा। बालों पर तेज के गिरने से एक बालक की उत्पत्ति हुई।जिसको सारा जगत बालि के नाम से जानते हैं।

थोड़ी देर बाद सूर्योदय होने पर सूर्य की दृष्टि भी उस सुन्दरी पर पड़ी, तो सूर्यदेव भी उसकी सुन्दरता पर मोहित हो गये। उनका तेज भी स्खलित हो गया,

जो उस स्त्री की ग्रीवा पर पड़ा।उससे जिस पुत्र का जन्म हुआ उसका नाम सुग्रीव पड़ा। क्योंकि ग्रीवा पर तेज गिरा था, इसीलिए वे सुग्रीव कहलाए।

दोनों ही सगे भाई थे। बड़ा भाई बालि इन्द्र का पुत्र और छोटा भाई सूर्य का पुत्र सुग्रीव था। बालों पर तेज गिरने से बालि और ग्रीवा पर तेज गिरने से सुग्रीव नाम पड़ा। दोनों का पालन पोषण उसी ऋक्षराज वानर से बनी हुई स्त्री ने किया और उसी ऋष्यमूक पर्वत को अपना निवास बनाया।