आज पढ़िए..!!!अनोखा ५००० साल पुराना पेड़ जिसको छूने मात्रा से मिट जाती है सभी परेशानियाँ..!!!

आज पढ़िए..!!!अनोखा ५००० साल पुराना पेड़ जिसको छूने मात्रा से मिट जाती है सभी परेशानियाँ..!!!

पारिजात वृक्ष
पारिजात वृक्ष

भारत में आज भी ऐसा वृक्ष मौजूद है जिसको तक़रीबन ४-५  हज़ार साल के बीच का बताया जा रहा है।हम बात कर रहे है पारिजात वृक्ष की ।वैसे तो ये पुरे भारत में पाया जाता है । लेकिन उत्तरप्रदेश के बारबंग के जिले में एक गांव है जिसका नाम है किन्तुर इस गांव के बारे में कहा जाता है जब पांडव और उनकी माँ को वनवास बिताना था तो वे इसी गांव में आये थे । वही से इस जगह का नाम किन्तुर पड़ गया । इस गांव में भारत का एक मात्र पारिजात का ऐसा पेड़ पाया जाता है जिसको छूने मात्र से ही मिट जाती है सारी थकान और जिसकी पूजा करने से इंसान की सारी परेशानियाँ दूर हो जाती है।

पुराणिक कथा के अनुसार इस पारिजात के सफेद फूलो से ही माता कुंती ने शिव जी की पूजा की थी ।यह भी कहा जाता है पारिजात वृक्ष को ही कल्प वृक्ष कहा जाता है । इसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी । इसके बाद इंद्र देव ने इसे स्वर्ग लोक में स्थापित किया था ।  इस के पीछे एक और पुराणिक कथा भी है । कहते है एक बार देव ऋषि नारद जी जब धरती पर भगवान् श्री कृष्ण से मिलने आये तो अपने साथ पारिजात के सुन्दर फूल लेकर के आये । उन्होंने वो फूल भगवान् श्रीकृष्ण को भेट किये । इसके बाद भगवान् श्री कृष्ण ने वो फूल अपने पास बैठी अपनी पत्नी रुक्मणि को दे दिए ।

लेकिन जब भगवान् श्री कृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा को इस का पता चला कि स्वर्ग से आये पारिजात के सारे फूल उन्होंने अपने पत्नी रुक्मणि तो इस बात पर उन्हें काफी क्रोध आया । और उन्होंने जिद पकड़ ली कि अपनी वाटिका में पारिजात वृक्ष चाहिए । सत्यभामा की जिद के आगे झुकते हुए भगवान् श्री कृष्ण ने अपने दूत को स्वर्ग से पारिजात वृक्ष लाने को भेजा । पर भगवान श्री इंद्रदेव ने पारिजात वृक्ष देने से मना कर दिया । दूत ने यह बात जब भगवान् श्री कृष्ण को बताई तो उन्होंने स्वयं ही इंद्र देव पर आक्रमण कर दिया । और इंद्रा को पराजित करके पारजात वृक्ष को जीत लिया । इससे रुष्ट होकर इंद्र देव ने पारिजात वृक्ष को फल से वंचित होने का श्राप दे दिया और तभी से आज तक यह वृक्ष फलविहीन हो गया । लेकिन इसके गुण अभी भी बरक़रार है इसको छूने मात्र से ही सारी थकान मिट जाती है ।