जानिये 400 पुराने मंदिर में दर्शन मात्र से मिल जाता है संतान सुख !!!

चार सौ साल पुराने मंदिर में दर्शन मात्र से मिल जाता है संतान सुख !!!

ऐतिहासिक सूर्य मंदिर
ऐतिहासिक सूर्य मंदिर

मध्य प्रदेश के दतिया जिले के उनाव बालाजी में स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केन्द्र बना हुआ है। लगभग चार सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक सूर्य मंदिर में संतान की चाहत रखने वाले श्रद्धालुओं की भगवान के दर्शन मात्र से संतान सुख की प्राप्ति हो जाती है।दतिया और झांसी सड‍क मार्ग के पहुंज नदी के किनारे पर आकर्षक और सुरभ्य पहाड़ियों में स्थित इस सूर्य मंदिर पर सूर्योदय की पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भागृह में स्थित मूर्ति पर पड़ती है और इस प्राचीन मंदिर में प्रतिदिन सैंकड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।

इस मंदिर में रोजाना अखंड ज्योति के लिए आठ किलो घी का उपयोग किया जाता है जबकि एक दिन में 17 किलो से अधिक का घी चढ़ावे में आता है। एक सप्ताह में यह घी सवा क्विंटल हो जाता है। अलग-अलग पर्वो पर आने वाले अतिरिक्त चढ़ावे को मिलाकर हर साल आठ टन का भंडार हो जाता है। घी को इकट्ठा करने के लिए पहले एक कुआं बनवाया गया, जब वह भर गया तो दूसरा। इस तरह पूरे नौ हो गए।

बालाजी धाम
बालाजी धाम

 

इस मंदिर में शुद्ध घी चढ़ाने की परंपरा लगभग 400 साल पहले से शुरू हुई थी। यहां मकर संक्रांति, बंसत पंचमी, रंग पंचमी और डोल ग्यारस पर ही काफी मात्र में शुद्ध घी चढ़ावे में आ जाता है। हर मौके पर भक्त 10 क्विंटल से ज्यादा घी चढ़ाकर जाते हैं।मंदिर के बारे मे मान्यता यह है कि असाध्य रोग से पीड़ित व्यक्ति यदि पहुज नदी में स्नान करके भगवान सूर्य की प्रतिमा पर जल चढ़ाता है तो उसे असाध्य रोगों से मुक्ति मिल जाती है और नि:संतान दंपत्ति को संतान का सुख मिलता है। मंदिर निर्माण 16वीं सदी में किया गया था