जानिए शक्ति पीठ मंदिर का महत्व , यहां सूर्य करता है माता लक्ष्मी के चरण स्पर्श :

आमतौर पर लोग धन-वैभव के लिए घर पर ही मा लक्ष्मी की पूजन करते हैं। परंतु महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर देश के प्रमुख मंदिरों में एक है। यहां पर साल में दो बार सूर्य की किरणें मा लक्ष्मी के विग्रह पर सीधी पड़ती है।ऐसा माना जाता है कि सूर्य की किरणें चरणों को स्पर्श करती हुई उनके मुखमंडल तक आती है। इस मंदिर में एक दीवार यंत्र पत्थर पर खोदकर बनाया गया है।

यहां पश्चिम की ओर देखती हैं माता लक्ष्मी :

ऐसा माना जाता है कि मंदिर में माता लक्ष्मी की मूर्ति के प्रत्येक हिस्से की सूर्य की किरणें अलग-अलग दिन दर्शन करती हैं। मंदिर की पश्चिमी दीवार पर एक खिड़की है जिसमें से सूर्य की रोशनी आती है और वह माता की मूर्ति को स्पर्श करती है। रथ सप्तमी के दिन सूर्य देवता माता लक्ष्मी के चरण छूते हैं। हर साल जनवरी माह में ऐसा होता है। अधिकतर मंदिरों में देवी-देवता पूर्व या उत्तर दिशा की ओर देख रहे होते हैं लेकिन इस मंदिर में माता लक्ष्मी का चेहरा पश्चिम दिशा की ओर रहता है।

“अम्बा माता का मंदिर” :
पुराणों के मुताबिक शक्ति पीठों में मां शक्ति उपस्थित होकर भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में जो भक्त इच्छा लेकर आता है वो पूर्ण हो जाती है। यह मंदिर “अम्बा माता का मंदिर” के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ इस मंदिर में निवास करती हैं।
राजा कर्णदेव ने करवाया था मंदिर का निर्माण :
इस मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में चालुक्य के राजा कर्णदेव ने करवाया था। ऐसा बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण अधुरा रह गया था, जिसे 9वीं शताब्दी में पूरा किया गया था। यह मंदिर 27 हजार वर्ग फुट में फैला हुआ है। यह मंदिर करीब 45 फीट ऊंचा है। इस मंदिर में स्थापित माता लक्ष्मी की मूरितु 4 फीट ऊंची है। ऐसा बताया जाता है माता की प्रतिमा करीब 7 हजार वर्ष पुरानी है। आदि गुरु शंकराचार्य ने माँ लक्ष्मी की मूर्ति में प्राण-प्रतिष्ठा की थी।