आरती करने का सही तरीका; जाने कितनी बार और क्यों घुमानी चाहिए आरती…!!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

हमारे हिन्दू धर्म(Hindu Dharma) में आरती(Aarti) एक महत्त्वपूर्ण कर्म है। किसी भी देवी-देवता(Devi Devta) के भजन, कीर्तन और पूजा के अंत में की जाती है। यह हिन्दू परंपरा की बहुत प्राचीन पद्धति है। इसे हर कोई पूजा (Pooja) करने के बाद करता है।

आरती एक महत्त्वपूर्ण कर्म है
आरती एक महत्त्वपूर्ण कर्म है

पौराणिक ग्रंथों(Pauranik Granth) और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इसे पूजा-पाठ(Pooja Path) आदि का अहम अंग बताया गया है। यह एक शास्त्रीय विधान है। हिंदू धर्म में पूजा में भगवान(Bhagwaan) की इसे उतारने का एक अलग ही महत्व है। पूजा पाठ के दौरान उसकी लौ को सिर माथे लगाना भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि न केवल इसे करने, बल्कि इसमें शामिल होने पर भी बहुत पुण्य मिलता है।

आरती के पाँच अंग

  1. प्रथम दीप माला के द्वारा
  2. दूसरे जल युक्त शंख से
  3. तीसरे धुले हुए वस्त्र से
  4. चौथे आम और पीपल आदि के पत्तों से
  5. पाँचवें साष्टांग दण्डवत से आरती करें
आरती
आरती

शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं का पूजन(Poojan) दिन में 5 बार करना चाहिए।

  1. सुबह 5 से 6 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त में पूजन और आरती(Aarti) होनी चाहिए।
  2. इसके बाद प्रात: 9 से 10 बजे तक दूसरी बार का पूजन। दोपहर में तीसरी बार पूजन करना चाहिए।
  3. इस पूजन के बाद भगवान को शयन करवाना चाहिए।
  4. शाम के समय चार-पांच बजे पुन: पूजन और आरती।
  5. रात को 8-9 बजे शयन आरती करनी चाहिए।

जिन घरों में नियमित रूप से पांच बार पूजन किया जाता है, वहां सभी देवी-देवताओं का वास होता है और ऐसे घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है।

आरती करने का सही तरीका
आरती करने का सही तरीका

धार्मिक कथा ( Religious Story)

आरती(Aarti) कितनी बार घुमाना चाहिए इसका रहस्य यह है कि आप जिस देव(Dev) की आरती(Aarti) कर रहें है देखें की कितनी संख्या है, उतनी ही बार घुमाना चाहिए।

  •  गणेश(Ganesh) जी के इसमें चतुर्थ तिथि के अधिष्ठाता हैं, इसलिए 4 बार घुमानी चाहिए ।

  • विष्णु(Vishnu) की तिथि भी द्वादशी है और महामंत्र भी द्वादशाक्षर है, अतः वैष्णो की आरती में 12 बार घुमानी चाहिए ।
  • सूर्य(Surya) सात रंग की विभिन्न सात किरणों वाले, सात घोड़ो से युक्त रथ में बैठा है, सप्तमी तिथि का अधिष्ठाता है, अतः सूर्य आरती में 7 बार घुमानी चाहिए ।
आरती लेना
आरती लेना
  • दुर्गा(Durga) की नव संख्या प्रसिद्ध है, नवमी तिथि है, अतः 9 बार बार घुमानी चाहिए ।
  • रुद्र(Rudra) एकादश है चतुर्दशी तिथि के अधिष्ठाता है, अंत: 11 या 14 बार घुमानी चाहिए ।

आरती कैसे उतारे

  • भगवान की प्रतिमा के चरणों में चार बार।
  • नाभि देश में दो बार।
  • मुखमण्डल पर एक बार ।
  • समस्त अंगों पर सात बार ।
आरती करने का सही तरीका
आरती करने का सही तरीका

जिस व्यक्ति को विभिन्न देवों के बीज मंत्र की जानकारी नहीं हो । तो उसे दीपक को ऐसे घुमाना चाहिए के उससे (Om) की आकृति बने।

॥ जय महाकाल ॥

Loading...