जानिए वो जगह जहाँ आज भी रासरचाते है कान्हा…!!!

जानिए वो जगह जहाँ आज भी रासरचाते है कान्हा…!!!

राधा कृष्ण

भगवान श्रीकृष्ण के लीलाओं के लिए विख्यात  वृंदावन में लाखों लोग दर्शन के लिए आते हैं।इसी वृंदावन में एक ऐसी जगह भी मौजूद है, जिसको लेकर मान्यता है कि वहां हर रात भगवान श्रीकृष्ण और राधा रास रचाने आते हैं। निधिवन के नाम से पहचानी जाने वाली इस जगह को लेकर कई ऐसी मान्यताएं हैं, जिन पर विश्वास करना कठिन है. जानिए निधिवन की मान्यताओं और उससे जुड़ी रोचक कहानियों के बारे में।

निधिवन

निधिवन

वृंदावन का निधिवन जिसके बारे में कहा जाता है की यहाँ आज भी हर रात कृष्ण गोपियों संग रासरचाते है, जिसके चलते सुबह खुलने वाले परिसर को संध्या आरती के पश्चात बंद कर दिया जाता है। निधि वन के अंदर ही है ‘रंगमहल’ जिसमें रोज़ रात राधाकृष्ण आते है। इसमें दोनों के लिए रखे गए चंदन की पलंग को शाम सात बजे के पहले सजा दिया जाता है। पलंग के बगल में पानी, श्रृंगार का सामान और नीम का दातुन व् पान रख दिया जाता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जब द्वार खुलता है तो पलंग बिखरा, पानी खाली, नीम का दातुन चबाया हुआ और पान खाया हुआ मिलता है। रंगमहल में भक्त केवल श्रृंगार का सामान ही चढ़ाते है और प्रसाद स्वरुप उन्हें भी वही सामान मिलता है।

रंग महल

निधि वन की एक अन्य खासियत यहाँ के तुलसी के पेड़ है जो की जोड़े में है, जब राधा संग कृष्ण वन में रास रचाते हैं तब यही जोड़ेदार पेड़ गोपियां बन जाती हैं। एक परंपरा यह भी है की इस वन में लगे जोड़े की वन तुलसी की कोई भी एक डंडी नहीं ले जा सकता है, अगर ले गए तो समस्या में घिर जाओगे जैसे पहले कई घिर गए इसलिए कोई भी इन्हें नहीं छूता।

राधे कृष्ण

वहां कोई नहीं रहता है यहाँ तक की निधिवन में दिन में रहने वाले पशु-पक्षी भी संध्या होते ही निधि वन को छोड़कर चले जाते है। फिर भी यदि कोई छुपकर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो पागल हो जाता है। एक बार काफी वर्ष पूर्व जब एक मारवाड़ी कृष्ण भक्त रासलीला देखने के लिए निधिवन में छुपकर बैठ गया थे, जब सुबह निधि वन के गेट खुले तो वे बेहोश अवस्था में थे,वे अपना दिमागी संतुलन खो बैठे थे । ऐसे अनेकों किस्से यहाँ के लोग बताते है।

कन्हैया की लीला अपरं पार है।

।।राधे कृष्ण।।