विष्णु का अनसुना पहलु…!!जानना जरुरी है…!!!

विष्णु का अनसुना पहलु…!!जानना जरुरी है…!!!

भारत की प्रवाहित परंपरा में विष्णु के छोटे बड़े २४ अवतार है ।विष्णु मने व्यापक।जो सब जगह है कोई दिवार नहीं,कोई संकीर्तन नहीं ।जगत में जिसमे ये लक्षण दिखें चाहे फिर वो कोई भी हो किसी भी धर्म और क्षेत्र का हो, उसे विष्णु के भाव से स्वीकार करना चाहिए ।जो सर्प की शय्या पर भी शांत हो, जो हर पल को प्रसन्नता से व्यतीत करे, जो जीवंत हो, जो दिव्यता का शिरोमणि हो, जो आकाश की तरह व्यापक हो, जो मेघ का वर्ण का हो ,जो लक्ष्मी का दास नहीं स्वामी हो ऐसे विष्णु हमारे भय का विनाश कर देते हैं ।

वे समस्त लोक के नाथ हैं ।१४ ब्राम्हणडो के अधिपति हैं ।जो शांत हो उग्र और व्यग्र न हो । इस जगत की अशांति में अगर कोई शांत बना रहे तो समझो विष्णु का एक अंग उसने जाग्रत कर लिया । विष्णु सहस्त्रनाम महाभारत का भाग है, जिसमे विष्णु की विशालता के ४० से ज्यादा नाम हैं ।पालनकर्ता विष्णु दायरों में बंधें किसी एक के नहीं है अपितु हर उस भक्त के दिल में रहते है जो उन्हें सच्चे मन से अपना लेता है ।