2 नही भगवन शिव के थे 6 पुत्र, जानिए सभी पुत्रो के बारे में…

जानिए शिव के ६ पुत्रो के बरो में –

भगवान शिव को संसार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से
शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। इनकी अर्धाङ्गिनी (शक्ति) का नाम पार्वती है।
शिव ने ब्रह्मा के पुत्र दक्ष की कन्या सती से विवाह किया था, लेकिन सती तो दक्ष के यज्ञ की आग में कूदकर भस्म हो गई थी। उनका
कोई पुत्र या पुत्री नहीं थी। तब कैसे जन्मे शिव के 6 पुत्र ?
सती के आत्मदाह करने के बाद सती ने अपने दूसरे जन्म में पर्वतराज हिमालय के यहां उमा के रूप में जन्म लिया यह उमा ही बाद में पार्वती के नाम से विख्‍यात हुईं। सती या उमा ही मां दुर्गा के रूप हैं।शिव और पार्वती के मिलन के बाद शिवजी का गृहस्थ जीवन शुरू हुआ और उनके जीवन में अनेक प्रकार की घटनाओं की शुरुआत हुई। पार्वती के साथ रहते हुए शिवजी के कई पुत्र हुए। उनमें ही प्रमुख 6 पुत्रों के बारे में आज हम आपको बताएँगे

1. गणेश : भगवान शिव की पहली पत्नी सती थीं, जो आग में जलकर भस्म हो गई थीं। उन्हीं सती ने जब दूसरा जन्म पार्वती के रूप
में लिया तब उन्होंने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए तपस्या की। शिवजी ने प्रसन्न होकर उनकी मनोकामना पूर्ण की और उनसे
विवाह किया।भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेशजी का जन्म हुआ था।

2. कार्तिकेय : शिव के दूसरे पुत्र कार्तिकेय को सुब्रमण्यम, मुरुगन और स्कंद भी कहा जाता है। उनके जन्म की कथा भी विचित्र है।
कार्तिकेय की पूजा मुख्यत: दक्षिण भारत में होती है। अरब में यजीदी जाति के लोग भी इन्हें पूजते हैं, ये उनके प्रमुख देवता हैं।
उत्तरी ध्रुव के निकटवर्ती प्रदेश उत्तर कुरु के क्षे‍त्र विशेष में ही इन्होंने स्कंद नाम से शासन किया था। इनके नाम पर ही स्कंद पुराण है।

3. सुकेश : विद्युत्केश का विवाह संध्या की पुत्री ‘सालकटंकटा’ से हुआ। माना जाता है कि ‘सालकटंकटा’ व्यभिचारिणी थी।
इस कारण जब उसका पुत्र जन्मा तो उसे लावारिस छोड़ दिया गया। विद्युत्केश ने भी उस पुत्र की यह जानकर कोई परवाह
नहीं की कि यह न मालूम किसका पुत्र है। पुराणों के अनुसार भगवान शिव और मां पार्वती की उस अनाथ बालक पर नजर पड़ी
और उन्होंने उसको सुरक्षा प्रदान की। इसका नाम उन्होंने सुकेश रखा।

4. जलंधर : शिवजी का एक चौथा पुत्र था जिसका नाम था जलंधर। श्रीमद्मदेवी भागवत पुराण के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपना तेज
समुद्र में फेंक दिया इससे जलंधर उत्पन्न हुआ। जलंधर शिव का सबसे बड़ा दुश्मन बना। श्रीमद्मदेवी भागवत पुराण के अनुसार जलंधर
असुर शिव का अंश था, लेकिन उसे इसका पता नहीं था। जलंधर बहुत ही शक्तिशाली असुर था।

5. अयप्पा : भगवान अयप्पा के पिता शिव और माता मोहिनी हैं। विष्णु का मोहिनी रूप देखकर भगवान शिव का वीर्यपात हो गया था।
उनके वीर्य को पारद कहा गया और उनके वीर्य से ही बाद में सस्तव नामक पुत्र का जन्म का हुआ जिन्हें दक्षिण भारत में अयप्पा कहा
गया। शिव और विष्णु से उत्पन होने के कारण उनको ‘हरिहरपुत्र’ कहा जाता है।

6. भूमा : एक समय जब कैलाश पर्वत पर भगवान शिव समाधि में ध्यान लगाये बैठे थे, उस समय उनके ललाट से तीन पसीने की बूंदें
पृथ्वी पर गिरीं। इन बूंदों से पृथ्वी ने एक सुंदर और प्यारे बालक को जन्म दिया, जिसके चार जिसके चार भुजाएं थीं और वय रक्त वर्ण
का था। इस पुत्र को पृथ्वी ने पालन पोषण करना शुरु किया। तभी भूमि का पुत्र होने के कारण यह भौम कहलाया।

शिव के अद्भुत चित्र –

गणेश माँ पार्वती और पिता शिव शंकर के साथ
भगवान् शिव
शिव के चित्र
भगवान् शिव
शिव पार्वती
शिव पार्वती
शिव प्रतिमा
शिव प्रतिमा

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