अदभुत रहस्य – मात्र बारह घन्टे के हनुमान ने सूर्य को फल क्यों समझा..?

अदभुत रहस्य – मात्र बारह घन्टे के हनुमान ने सूर्य को फल क्यों समझा..?

हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर खा लिया
हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर खा लिया

जब हनुमान जी का जन्म हुआ, और जब वे 12 घन्टे के हुए तो उन्हें बहुत जोर की भूख लगी।उसी समय सूर्य देव उदय हो रहे थे। सूर्य की लालिमा को देख कर हनुमान जी बहुत खुश हुए उन्होंने अपनी भूख को शांत करने के लिए सूर्य को फल समझकर खा लिया।लेकिन क्या आप जानते है हनुमान ने सूर्य को फल क्यों समझा, आइये आज जानते है ऐसा क्यों हुआ:

“बाल समय रवि भक्ष लिहेव तब तीनहु लोक भयो अंधियारो”

हनुमान ने सूर्य को फल क्यों समझा ?

पूर्व कल्प की बात है। भगवान शिव के ग्यारहवें रूद्र “हर” माँ भुवनेश्वरी की तपस्या में लीन थे। तपस्या से खुश होकर माता जी ने श्री हर को बारह कलाओं से पूर्ण 12 आम के फल दिये और बोलीं– इन फलों का भक्षण करने से अदभुत तेज प्राप्त होगा। आप जब चाहें सूर्य बनकर ब्रम्हांड को प्रकाशित

कर सकते हैं। अंधेरा आप के आगे नही टिकेगा।

श्री हर उन फलों को लाकर एक जगह रख दिया। और सोचा संध्या वंदन करने के बाद इन फलों को खाऊँगा। श्री हर संध्या वंदन करने लगे। इतने में सूर्य देव आये और श्री हर की तपस्या का फल खा गये। श्री हर को क्रोध आ गया और श्री हर ने सूर्य को श्राप दे दिया तुमने चोरी से मेरे फलों को खाया है,

लेकिन अगले हनुमान अवतार मे मै सम्पूर्ण श्रृष्टि के सामने तुम्हारा भक्षण करके माता के दिये इस तेज को प्राप्त करूँगा।

इसलिए श्री हर रूपी हनुमान जी ने सूर्य का भक्षण किया ।