इस अमावस्या को 1लोटा जल इस मुख करके चढ़ा दें !! फिर देखे कैसे मिलता है अपको मान सम्मान और शोहरत !!

इस अमावस्या को 1लोटा जल इस मुख करके चढ़ा दें !! फिर देखे कैसे मिलता है अपको मान सम्मान और शोहरत !!

आज है शनिश्चरी अमावस्या यह बहुत ही अच्छी अमावस्या है यहां अमावस्या चंद्रमास के कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है । इसके बाद चंद्र दर्शन के साथ ही शुक्लपक्ष की शुरुआत होती है। पूर्णिमान पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के प्रथम पखवाड़े का अंतिम दिन होता है और अमावस्या पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के अंतिम पखवाड़े का अंतिम दिन भी होता है। जिस दिन धर्म-कर्म स्नान दांत अर्पण आदि के लिए यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है साथ ही ग्रह दोष जिनके कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए भी अमावस्या तिथि पर ज्योतिष उपाय करने चाहिए।

आषाढ़ मास हिंदू वर्ष का चौथा माह होता है और मान्यता के अनुसार इस माह में बहुत सारे धर्म कर्म आदि करने से मनुष्य को श्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है।अमावस्या की रात को जब आसमान में चंद्रमा नहीं होता है और चारों और घना अंधेरा होता है तो वहां रात तांत्रिक टोटके के लिए बहुत उत्तम बताई जाती है। और इस दिन अगर आप कोई विशेष कार्य करें तो आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं अमावस्या के दिन  यह उपाय जिससे आपकी किस्मत बदल जाएगी। तो आइए जानते है।आज का दिन पूर्वजों को समर्पित होता है़ आज के दिन यह उपाय जरूर करें।

पितृदोष निवारण के लिए पितरों को जल तर्पण करना चाहिए तर्पण करते समय एक पीतल के बर्तन में जल, गंगाजल, थोड़ा सा कच्चा दूध, काले तिल, तुलसी के पत्ते, शहद और थोड़े सफेद पूल डालकर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके यह जल अर्पित करें। और तीन बार बोले तपरान्तयामि।।
यह मंत्र बोलने के बाद थोड़ा सा अपने हाथों में तिल और शहद, जल के साथ लेकर अपने अंगूठे की ओर से किसी बर्तन में छोड़ दें ऐसा करने से पितरों को मुक्ति मिलती है।

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