राम से बड़ा राम का नाम; जाने क्यों है राम-नाम जादू के समान…!!!

धार्मिक कथा ( Religious Story) 

कहा जाता है की निरन्तर श्रीराम (Ram) नाम का जप करते रहने से मनुष्य के शरीर व प्राणों का व्यायाम हो जाता है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है ।

एक श्लोक के अनुसार

‘रा’ अक्षर के कहत ही निकसत पाप पहार ।

पुनि भीतर आवत नहिं देत ‘म’कार किंवार ।।

श्रीराम
श्रीराम

इसका अर्थ है —‘रा’ अक्षर के कहते ही सारे पाप शरीर से बाहर निकल जाते हैं और वे दुबारा शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते क्योंकि ‘म’ अक्षर तुरन्त शरीर के सारे दरवाजे बन्द कर देता है ।

दरअसल माना गया है मानव शरीर पापों को भोगने के लिए मिला है, जब सारे पाप ही शरीर से निकल जाएंगे ।

तो शरीर अपने-आप स्वस्थ, पवित्र और ओजयुक्त हो जाएगा ।

राम (Ram)नाम का जप करते रहने से मनुष्य अन्य अपशब्दों का उच्चारण नहीं करता है  जिससे वाणी शुद्ध हो जाती है ।

पवित्र नाम लेते रहने से आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है, मनुष्य के बुरे विचार और आदतें दूर हो जाती हैं ।

वह पवित्रता, महानता और उच्च आदर्शों के मार्ग पर चलने लगता है ।

यही आध्यात्मिक उन्नति धीरे-धीरे हमें स्वास्थ्य, सुख, शान्ति और संतुलन की ओर ले जाती है ।

राम से बड़ा राम का नाम
राम से बड़ा राम का नाम

राम से बड़ा राम का नाम

एक दूसरे श्लोक के अनुसर

राम-नाम जपतां कुतो भयं, सर्व ताप शमनैक भेषजम्ं ।।

जिसका अर्थ है—‘राम (Ram) नाम’ जपने वालों को कोई भय कहां ।

यह तो सभी तापों को दूर करने की एकमात्र औषधि है ।

श्रीराम (Ram) का सहारा लेकर मनुष्य अपने जीवन को शांत और सुखमय बना सकता है।

कहते है त्रेता में तो केवल एक रावण (Ravan) था जिसके ऊपर राम (Ram) नाम से विजयी पायी गई थी , लेकिन कलियुग में अनगिनत बीमारियां रूपी रावण (Ravan) हैं ।

उन रावणों पर विजय पाने के लिए श्रीराम (Ram) की शक्ति की आवश्यकता है और वह शक्ति ‘राम (Ram) नाम’ में समय हुई है।

श्रीराम
श्रीराम

राम (Ram) नाम’ एक औषधि की तरह काम करता है जिससे सारा दुःख छूमंतर हो जाता है ।

तीन करोड़ नाम जपने से हाथ की रेखाएं बदलने लगती हैं ।

राम-नाम को लेने के कुछ नियम

  • इसकी पहली शर्त है कि नाम दिल से निकलना चाहिए ।

जब तक मनुष्य अपने अंदर-बाहर की सच्चाई, ईमानदारी और पवित्रता के गुणों को नहीं अपनाता।

तब तक उसके दिल से नाम नहीं निकल सकता है ।

श्रीराम
श्रीराम
  • दिल में श्रीराम (Ram) को बसा लेने के लिए बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है ।
  • जिसने सारी वासनाओं को त्याग दिया है वही सच्चे अर्थ में ‘रामरस’ को पी सकता है ।

 

॥ जय राम जय राम जय जय राम ॥