महादेव मंदिर; यहाँ हनुमान शिव जी को अपने कंधे पर लेकर आए..!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Stories)

-आज हम बात कर रहें है छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की।

-यहाँ महादेव(Mahadev) घाट पर स्थित है हटकेश्वर महादेव(Mahadev) का चमत्कारिक मंदिर ।

-खारुन नदी के तट पर स्थित मंदिर(Mandir) के पीछे त्रेतायुग की एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है।

-जिसके अनुसार हनुमान(Hanuman) जी शिव(Shiv) जी को अपने कंधे पर यहां लाए थे।

 महादेव मंदिर
महादेव मंदिर

-इस कथा के चलते ही यह मंदिर(Mandir) दूर-दूर तक जाना जाता है।

-मान्यता है कि भगवान श्रीराम(Ram) वनवास के दौरान का है।

-जब वे छत्तीसगढ़ के इस इलाके से गुजर रहे थे तब का ।

-इस शिवलिंग(Shivling) की स्थापना लक्ष्मणजी के हाथों हुई थी।

हटकेश्वर महादेव मंदिर

कहा जाता है कि स्थापना के लिए हनुमानजी(Hanuman) अपने कंधे पर शिवजी को लेकर निकल पड़े। बाद में ब्राह्मण देवता को आमंत्रण करने गए तब तक देर हो गई। इधर लक्ष्मणजी(Laxman) देरी होने से क्रोधित हो रहे थे। स्थापना के समय में देर हो गई थी।इसलिए स्थापना के समय को देखते हुए खारुन नदी के तट पर ही स्थापना की।

 महादेव मंदिर में हटकेश्वर महादेव
महादेव मंदिर में हटकेश्वर महादेव

यहां देशभर ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। खारुन नदी के तट पर होने की वजह से महादेव घाट के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर(Mandir) रायपुर शहर से 8 किमी दूर स्थित 500 साल पुराना है। भगवान शिव(Shiv) के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।

पौराणिक कथा (Mythological Stories)

इस मंदिर(Mandir) को लेकर मान्यता भी है।  इस शिवलिंग(Shivling) के दर्शन मात्र से भक्तों की हर इच्छा पूरी हो जाती है। बारिक नक्काशी से सुसज्जित है मंदिर।  इस भव्य मंदिर(Mandir) की आंतरिक और बाहरी कक्षों की शोभा देखते ही बनती है। इस मंदिर(Mandir) के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के पास ही रामजानकी, लक्ष्मण और बरहादेव की प्रतिमा है।

 महादेव मंदिर
महादेव मंदिर

बताया जाता है खारुन नदी के बीचों-बीच जाकर यहां पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान(Pind daan) भी किया जाता है। गया(Gaya) और काशी(Kashi) की तरह यहां विशेष पूजा पाठ भी किया जाता है।राजा ब्रह्मदेव के विक्रम संवत् 1458 अर्थात 1402 ई. के शिलालेखों से ज्ञात होता है कि हाजीराज ने यहां मंदिर का निर्माण कराया था।

महादेव घाट

यह मंदिर(Mandir) बाहर से आधुनिक प्रतीत होता है, किंतु संपूर्ण संरचना को देखने से इसके उत्तर-मध्यकालीन होने का अनुमान किया जा सकता है। यहां कार्तिक-पूर्णिमा के समय एक बड़ा मेला लगता है।

 

॥ जय हटकेश्वर महादेव ॥