किसके लिए किये माँ पार्वती को अपने समस्त पुण्यों का दान; पढ़िए अद्भुत कहानी…!!!

धार्मिक कथा ( Religious Story)    

बात उस समय की है जब माँ सती(Sati) के वियोग में भगवान शिव(Shiv) घोर तपस्या में लीन हो गए ।

इधर तारकासुर(Tarkasur) नामक राक्षस ने तीनो लोक में हाहाकार मचा दिया ।

महादेव घोर तपस्या में लीन
महादेव घोर तपस्या में लीन

तारकासुर(Tarkasur) से परेशान होकर इंद्र(Indra) देव ब्रह्मा(Brahma)जी के पास गए तथा उन्हें तारकासुर(Tarkasur) के बारे में बताया ।

ब्रह्मा(Brahma) जी बोले की माँ सती(Sati) पुनः पर्वत राज हिमालय(Himalaya) की पुत्री पार्वती(Parwati) के रूप में जन्म लेगी ।

देवी पार्वती(Parwati) तथा भगवान शिव(Shiv) के पुत्र के द्वारा ही तारकासुर(Tarkasur) का वध होगा ।

पार्वती(Parwati) ने हिमालयराज की पुत्री के रूप में जन्म लिया ।

जब वे बड़ी हुई तो उन्होंने भगवान शिव(Shiv) को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की जिससे भगवान शिव(Shiv) प्रसन्न होकर उनके समाने प्रकट हुए तथा उन्हें वरदान दिया ।

माँ पार्वती ने किये अपने समस्त पुण्यों का दान

विवाह से पूर्व भगवान शिव (Shiv) ने माँ पार्वती(Parwati) के परीक्षा लेनी चाहि ।

माँ पार्वती ने की तपस्या
माँ पार्वती ने की तपस्या

अतः एक दिन जब माँ पार्वती(Parwati) नदी के पास से गुजर रही थी तो उन्हें किसी बालक के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी ।

वे उस दिशा की ओर गयी जहा से बालक के चिल्लाने की आवाज आ रही थी, उन्होंने एक बालक को मगर के मुह में पाया ।

माँ पर्वती(Parwati) ने कहा आप इस बालक के बदले जो भी मांगेंगे में आपको दूंगी परन्तु इस बालक को मुक्त कर दो ।

मगर माँ पार्वती(Parwati) से बोला में इस बालक को एक शर्त पर छोड़ सकता हूँ ।

अगर आप भगवान शिव(Shiv) से प्राप्त वरदान का समस्त पुण्य मुझे दे दो ।

शिव पार्वती
शिव पार्वती

माँ बोली आप सिर्फ इस बालक को मुक्त कर दो तथा बदले में मेरे इस जन्म के ही नही बल्कि समस्त जन्म के पुण्य रख लें।

भगवान शिव से जुड़ी कथा (Stories of Lord Shiv)

जैसे ही माँ पार्वती(Parwati) ने अपने समस्त पुण्यो को मगर को दिया, मगर का समस्त शरीर तेज प्रकाश से चमकने लगा ।

वह बहुत सुन्दर दिखाई देने लगा ।

मगर बोला ‘हे देवी ! एक साधारण से बालक के प्राण को बचाने के लिए आपने अपने समस्त पुण्यो का त्याग क्यों कर दिया ?

माँ पार्वती(Parwati) मगर से बोली की तप के द्वारा पुण्य तो में फिर से प्राप्त कर सकती हूँ ।

परन्तु इस निर्दोष बालक को इस तरह मृत्यु को प्राप्त होना में सहन नही कर पाती ।

बालक और मगर अचानक माँ पार्वती(Parwati) के नजरो से ओझल हो गए।

शिव पार्वती
शिव पार्वती

तब माँ पर्वत की और गयी तभी वहां महादेव(Mahadev) उनके सामने प्रकट हो गए।

भगवान शिव(Shiv) ने उनके पर्वत पर आने का कारण पूछा तो माँ बोली की एक बालक को मगर से बचाने के लिए मेने अपने समस्त पुण्यो का दान कर दिया है अतः में पुनः तपस्या कर रही हूँ ।

भगवान शिव(Shiv) मुस्कराते हुए बोले की मगर और बालक दोनों मैं ही था।

महादेव ने कहा में तुम्हारी परीक्षा ले रहा था तथा में तुम से संतुष्ट हूँ ।

फिर भगवान शिव(Shiv) ने उन्हें आशीर्वाद देकर उनके तप के समस्त पुण्य उन्हें वापस लोटा दिए।

 

॥ जय महाकाल ॥

 

Loading...