जब हुआ प्रभु श्री कृष्ण को सर दर्द,क्या करा देवर्षि नारद ने; पढ़ें भगवन की अद्भुत लीला…!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

-पुराणों में एक अद्भुत कहानी वर्णित है जो भक्त और भगवान् के प्रेम को उजागर करती है।

-आप भी पढ़िए और आनंद लीजिये प्रभु की अद्भुत लीला का।

-एक बार तीनों लोकों में राधा(Radha) की स्तुति से देवर्षि नारद(Devarshi Narad) खीझ गए थे।

श्री कृष्ण
श्री कृष्ण

-यहाँ तक की भगवान् श्री कृष्ण(Krishna) भी उनका ही नाम लेते थे।

-उनको राधा(Radha) रानी से जलन होने लगी थी ।

-उनकी शिकायत थी कि वह तो कृष्ण से अथाह प्रेम करते हैं फिर उनका नाम कोई क्यों नहीं लेता।

-हर भक्त ‘राधे-राधे’ क्यों करता रहता है।

-वह अपनी यह व्यथा लेकर श्रीकृष्ण(Krishna) के पास पहुंचे।

देवर्षि नारद ने पिलाया चरणामृत

-वहां जाकर देवर्षि नारद(Devarshi Narad) ने देखा कि श्रीकृष्ण(Krishna) भयंकर सिर दर्द से कराह रहे हैं।

-देवर्षि नारद(Devarshi Narad) के हृदय में भी टीस उठी। उन्होंने पूछा, ‘भगवन! क्या इस सिर दर्द का कोई उपचार है। मेरे हृदय के रक्त से यह दर्द शांत हो जाए तो मैं अपना रक्त दान कर सकता हूं।’

देवर्षि नारद ने देखा कि श्रीकृष्ण भयंकर सिर दर्द से कराह रहे हैं
देवर्षि नारद ने देखा कि श्रीकृष्ण भयंकर सिर दर्द से कराह रहे हैं

-श्रीकृष्ण(Krishna) ने उत्तर दिया, देवर्षि नारद(Devarshi Narad), मुझे किसी के रक्त की आवश्यकता नहीं है। अगर मेरा कोई भक्त अपना चरणामृत(Charnamrit) यानी अपने पांव धोकर पिला दे, तो मेरा दर्द शांत हो सकता है।’

-नारद( Narad) ने मन में सोचा, ‘भक्त का चरणामृत(Charnamrit), वह भी भगवान के श्रीमुख में।

-ऐसा करने वाला तो घोर नरक का भागी बनेगा।

देवर्षि नारद ने पिलाया श्रीकृष्ण को चरणामृत
देवर्षि नारद ने पिलाया श्रीकृष्ण को चरणामृत

-भला यह सब जानते हुए नरक का भागी बनने को कौन तैयार हो?’ श्रीकृष्ण(Krishna) ने नारद( Narad) से कहा कि वह रुक्मिणी के पास जाकर सारा हाल सुनाएं तो संभवत: रुक्मिणी इसके लिए तैयार हो जाएं।

-नारदजी( Narad) रुक्मिणी के पास गए। उन्होंने रुक्मिणी को सारा वृत्तांत सुनाया तो रुक्मिणी बोलीं, ‘नहीं, नहीं! देवर्षि, मैं यह पाप नहीं कर सकती।’

धार्मिक कथा ( Religious Story)

-नारद( Narad) ने लौटकर रुक्मिणी की बात श्रीकृष्ण(Krishna) के पास रख दी।

-अब श्रीकृष्ण ने उन्हें राधा(Radha) के पास भेजा। राधा(Radha) ने जैसे ही सुना, तत्काल एक पात्र में जल लाकर उसमें अपने दोनों पैर डुबोए।

देवर्षि नारद ने पिलाया श्रीकृष्ण को चरणामृत
देवर्षि नारद ने पिलाया श्रीकृष्ण को चरणामृत

-फिर वह नारद( Narad) से बोली, ‘देवर्षि, इसे तत्काल श्रीकृष्ण(Krishna) के पास ले जाइए। मैं जानती हूं कि भगवान को अपने पांव धोकर पिलाने से मुझे रौरव नामक नरक में भी ठौर नहीं मिलेगा। पर अपने प्रियतम के सुख के लिए मैं अनंत युगों तक नरक की यातना भोगने को तैयार हूं।’

-चरणामृत(Charnamrit) पीते ही प्रभु का सर दर्द ठीक हो गया था और अब देवर्षि भी अच्छी तरह समझ गए थे कि तीनों लोकों में राधा(Radha) के प्रेम के स्तुतिगान क्यों हो रहे हैं। उन्होंने भी अपनी वीणा उठाई और राधा की स्तुति गाने लगे।

 

॥राधे राधे जय श्री राधे ॥

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