जानिए देवउठनी एकादशी व्रत करने के 10 फायदे :

षाढ़ के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी को आषाढ़ी एकादशी, हरिशयनी तथा पद्मनाभा एकादशी आदि नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी से विष्णु भगवान का शयन काल प्रारंभ हो जाता है जो लगभग चार माह के लिए रहता है। इसी दिन से विवाह समेत सभी शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। इसके पश्चाद कार्तिक माह की एकादशी को देव उठ जाते हैं जिसे देव उठनी ग्यारस, हरि प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है।
 

  1. इस दिन से विवाह आदि मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं जब देव जागते हैं तभी कोई मांगलिक कार्य संपन्न प्रारंभ होता है।
  1. एकादशी के व्रत से अशुभ संस्कार नष्ट हो जाते हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन निर्जल या केवल जलीय पदार्थों पर व्रत रखना चाहिए। यदि व्रत नहीं रख रहे हैं तो इस दिन चावल, प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा, बासी भोजन आदि बिलकुल न खाएं।
  1. इस दिन शालीग्राम के साथ तुलसी का आध्यात्मिक विवाह देव उठनी ग्यारस को होता है। इस दिन तुलसी की पूजा का महत्व होता है। तुलसी दल अकाल मौत से बचाता है। शालीग्राम तथा तुलसी की पूजा से पितृदोष का शमन होता है।
  1. इस दिन विष्णु भगवान या अपने इष्ट-देव की उपासना करना चाहिए। इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः “मंत्र का जाप करने से लाभ होता है।
  1. कुंडली में चंद्रमा के कमजोर होने की स्थिति में जल तथा फल खाकर या निर्जल एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। व्यक्ति यदि सभी एकदशियों में व्रत रखता है तो उसका चंद्र सही होकर मानसिक स्थिति भी सुधर जाती है।
  1. इस दिन देवउठनी एकादशी की पौराणिक कथा का श्रवण या वाचन करना चाहिए। कथा सुनने या कहने से पुण्य प्राप्त होता है।
  1. ऐसा कहते हैं कि देवोत्थान एकादशी का व्रत करने से हजार अश्वमेघ एवं सौ राजसूय यज्ञ का फल मिलता है।
  1. पितृदोष से पीड़ित लोगों को इस दिन विधिवत उपास करना चाहिए। पितरों के लिए यह उपास करने से अधिक लाभ मिलता है जिससे उनके पितृ नरक के दुखों से छुटकारा पा सकते हैं।
  1. देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी का उपवास करने से भाग्य जाग्रत होता है। 
  1. पुराणों के मुताबिक जो व्यक्ति एकादशी करता रहता है वह जीवन में कभी भी संकटों से नहीं घिरता और उनके जीवन में धन और समृद्धि बनी रहती है।