जरूर पढ़िए कैसे हनुमान की मदद से श्री कृष्ण ने तोड़ा इन तीनों का अहंकार…!!!

जरूर पढ़िए कैसे हनुमान की मदद से श्री कृष्ण ने तोड़ा इन तीनों का अहंकार…!!!

जरूर पढ़िए कैसे हनुमान की मदद से श्री कृष्ण ने तोड़ा इन तीनों का अभिमान…!!!

भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु का अवतार है।एक बार की बात है  श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा, सुदर्शन चक्र और गरूड़ को घमंड हो चला था।

गरुड़

 

एक दिन श्रीकृष्ण अपनी द्वारिका में रानी सत्यभामा के साथ सिंहासन पर विराजमान थे और उनके निकट ही गरूड़ और सुदर्शन चक्र भी उनकी सेवा में विराजमान थे। बातों ही बातों में रानी सत्यभामा ने पूछा,आपने राम के रूप में अवतार लिया था, सीता आपकी पत्नी थीं। क्या वे मुझसे भी ज्यादा सुंदर थीं? भगवान सत्यभामा की बातों का जवाब देते उससे पहले ही गरूड़ ने कहा- भगवान क्या दुनिया में मुझसे भी ज्यादा तेज गति से कोई उड़ सकता है। तभी सुदर्शन से भी रहा नहीं गया और वह भी बोल उठा कि भगवान, मैंने बड़े-बड़े युद्धों में आपको विजयश्री दिलवाई है। क्या संसार में मुझसे भी शक्तिशाली कोई है? द्वारकाधीश समझ गए कि तीनों में अभिमान आ गया है। वे सोचने लगे कि इनका अहंकार कैसे नष्ट किया जाए, तभी उन्हें हनुमान जी की याद आई। उन्होंने गरूड़ से कहा तुम हनुमान के पास जाओ और कहना कि भगवान राम, माता सीता के साथ उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। गरूड़ हनुमान को लाने चले गए। इधर श्रीकृष्ण ने सत्यभामा से कहा कि देवी, आप सीता के रूप में तैयार हो जाएं और स्वयं द्वारकाधीश ने राम का रूप धारण कर लिया। तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र को आज्ञा देते हुए कहा कि तुम महल के प्रवेश द्वार पर पहरा दो और ध्यान रहे कि मेरी आज्ञा के बिना महल में कोई भी प्रवेश न करने पाए। गरूड़ ने हनुमान के पास पहुंचकर कहा कि भगवान राम, माता सीता के साथ द्वारका में है आपको मिलने के लिए बुलाया है। आप मेरे साथ चलिए मैं आपको अपनी पीठ पर बैठाकर शीघ्र ही वहां ले जाऊंगा।

सुदर्शन चक्र

हनुमान ने विनयपूर्वक गरूड़ से कहा, आप चलिए मैं आता हूं। गरूड़ ने सोचा, पता नहीं यह बूढ़ा वानर कब पहुंचेगा। खैर मुझे क्या कभी भी पहुंचे, मेरा कार्य तो पूरा हो गया। मैं भगवान के पास चलता हूं। लेकिन महल में पहुंचकर गरूड़ देखते हैं कि हनुमान तो उनसे पहले ही महल में प्रभु के सामने बैठे हैं। गरूड़ का सिर लज्जा से झुक गया। तभी श्रीराम के रूप में श्रीकृष्ण ने हनुमान से कहा कि पवनपुत्र तुम बिना आज्ञा के महल में कैसे प्रवेश कर गए? क्या तुम्हें किसी ने प्रवेश द्वार पर रोका नहीं?  हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए सिर झुकाकर अपने मुंह से सुदर्शन चक्र को निकालकर प्रभु के सामने रख दिया। हनुमान ने कहा कि प्रभु आपसे मिलने से मुझे इस संसार में कोई नहीं रोक सकता,इस चक्र ने रोकने का प्रयास किया था इसलिए इसे मुंह में रख मैं आपसे मिलने आ गया।

महारानी सत्यभामा के साथ भगवान कृष्ण

हनुमान ने हाथ जोड़ते हुए श्रीराम से प्रश्न किया,मैं आपको तो पहचानता हूं आप ही श्रीकृष्ण के रूप में मेरे राम हैं, लेकिन आज आपने माता सीता के स्थान पर किस दासी को इतना सम्मान दे दिया कि वह आपके साथ सिंहासन पर विराजमान है।

अब रानी सत्यभामा का अहंकार भंग होने की बारी थी। उन्हें सुंदरता का अहंकार था, जो पलभर में चूर हो गया था। रानी सत्यभामा, सुदर्शन चक्र व गरूड़ तीनों का गर्व चूर-चूर हो गया था। वे भगवान की लीला समझ रहे थे। भगवान ने अपने भक्तों के अंहकार को अपने भक्त हनुमान द्वारा ही दूर किया। भगवन ने अपने भक्तों का अहंकार दूर कर हमे ज्ञान दिया है की हमे अहंकार कभी नहीं करना चाहिए।

ऐसे है हमारे ठाकुर जी उनकी लीला अपरं पार है।

 

 

Deepika Gupta

34 Comments

Add a Comment

Your email address will not be published.