इस शिवरात्रि जानिए -आखिर क्यों भगवान शंकर कहलाते हैं कालों के काल महाकाल

आखिर क्यों भगवान शंकर कहलाते हैं कालों के काल महाकाल

कालों के काल महाकाल

शिव महापुराण  के २२ वे अध्याय के अनुसार दूषण नमक एक दैत्य से भक्तो की रक्षा करने के लिए भगवान शिव ज्योति के रूप में उज्जैन में प्रकट हुए थे । दूषण संसार का काल था और शिव शंकर ने उसे खत्म कर दिया इसलिए शंकर भोलेनाथ महाकाल के नाम से पूज्य हुए। अतः दुष्ट दूषण का वध करने के पश्चात् भगवान शिव कहलाये कालों के काल महाकाल उज्जैन में महाकाल का वास होने से पुराने साहित्य में उज्जैन को महाकालपुरम भी कहा गया है। उज्जैन में एक कहावत प्रसिद्ध है “अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का, काल भी उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का

भगवान महाकाल का सच्चे मन से पूजन करने से सभी कष्टो से मुक्ति मिल जाती है ।हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान शंकर को मृत्यु लोक के देवता माना जाता है, इसलिए वो अवतार न होते हुए स्वयं साक्षात ईश्वर है और कालों के काल होने के कारण उन्हें महाकाल कहा जाता है जिसका न आरम्भ है न ही अंत है ।

महाकाल को काल का अधिपति माना गया है तथा खासतौर पर भगवान शंकर का पूजन करने से  मृत्यु का भय दूर हो जाता है एवं अगर सच्चे  मन से भगवान शंकर की पूजा की जाये तो मृत्यु के बाद यमराज द्वारा दी गई यातनाओ से  भी मुक्ति मिल जाती है।

॥जय महाकाल ॥