आचार्य चाणक्य की ये बातें आपको बचाएंगी बर्बादी से; जरूर रखें याद…!!!

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आचार्य चाणक्य (Chanakya)हमारे देश के महान विचारक के रूप में माने गए है।

करीब 2300 साल पहले पैदा हुए आचार्य चाणक्य (Chanakya) भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र के पहले विद्वान माने जाते हैं।

आचार्य चाणक्य
आचार्य चाणक्य

कहते है चाणक्य (Chanakya) काे राजनीति के चतुर खिलाड़ी माना जाता हैं, और वे ज्ञान के केंद्र तक्षशिला विश्वविद्यालय में आचार्य रहे हैं।

इसी कारण उनकी नीति मात्र कोरे आदर्शवाद पर नहीं बल्कि व्यावहारिक ज्ञान पर टिकी है।

चाणक्य नीति (Chanakya Neeti) में कई ऐसी बातें लिखी है जिसका पालन करने से व्यक्ति एक सुखमय जीवन व्यतीत कर सकता है।

अाज हम अापकाे आचार्य चाणक्य (Chanakya) की कुछ एेसी बातें बताने जा रहे हैं।

जिन्हें अगर अाप जिंदगी भर याद रखेंगे, ताे कभी भी धाेखा नही खाएंगे।

तो आइये जानते है आचार्य चाणक्य (Chanakya) की ये बातें जो आपको बचा सकती है बर्बादी से।

चाणक्य नीति
चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य की बातें

  • आचार्य चाणक्य (Chanakya) कहते है किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए, क्योंकि सीधे तने वाले पेड़ काे ही सबसे पहले काटे जाता हैं।

इसलिए बहुत ज्यादा ईमानदार लोगों को ही सबसे ज्यादा परेशानी और कष्ट उठाने पड़ते हैं।

  • आचार्य चाणक्य (Chanakya) का कहना है की हर मित्रता के पीछे कुछ न कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है।

यह कटु सत्य है लेकिन यही सत्य है।

  • जो बीत गया, सो बीत गया, अपके हाथ से कोई गलत काम हो गया हो तो उसकी फिक्र छोड़ते हुए वर्तमान को सलीके से जीकर भविष्य को संवारना चाहिए।
आचार्य चाणक्य
आचार्य चाणक्य

बुद्धिमान व्यक्ति केवल वर्तमान में जीते हैं।

  • काम चाहे छोटा हो या बड़ा हो, एक बार हाथ में लेने के बाद उसे कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

अपनी लगन से उस काम को पूरा करना चाहिए।

  • जैसे शेर अपने पकडे हुए शिकार को कभी नहीं छोड़ता।

उसी तरह अगर आप कुछ नया काम करने जा रहे हैं, तो उसे तब तक ना छाेड़े जब तक वह पूरा ना हाे जाएं।

चाणक्य नीति
चाणक्य नीति

कभी भी अपने रहस्यों को किसी के साथ सांझा मत करो, यह प्रवृत्ति तुम्हें बर्बाद कर देगी।

  • आगे आचार्य चाणक्य (Chanakya) कहते है ऐसा पैसा जो बहुत तकलीफ के बाद मिले,

अपना धर्म-ईमान छोडऩे पर मिले या दुश्मनों की चापलूसी से,

उनकी सत्ता स्वीकारने से मिले, उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए।