अद्भुत जगह जो है अश्वत्थामा की जन्मस्थली; यहीं दिया था भगवान शिव ने अश्वत्थामा को अमरता का वरदान…!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

हमारे देश के उत्तराखंड को देवभूमि(Devbhoomi) का दर्जा दिया गया है।

ऐसा इसलिए क्यूंकि यहां पर लोगों की आस्था के बहुत से केंद्र हैं।

यहाँ आकर लोगों को शांति का अनुभव होता है।

अश्वत्थामा की जन्मस्थली:टपकेश्वर महादेव मंदिर
अश्वत्थामा की जन्मस्थली:टपकेश्वर महादेव मंदिर

ऐसा ही एक मंदिर है टपकेश्वर महादेव मंदिर (Tapkeshwar Mahadev Mandir)

जो देहरादून(Dehradun) से महज सात किलोमीटर की दूरी पर गढ़ी कैंट क्षेत्र में स्थित है।

यह मंदिर बहुत ही पुराना है।

यहां पर भगवान शिव(Shiv) के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।

देवभूमि पर बने इस मंदिर(Mandir) को मनोकामना पूर्ति स्थल माना जाता है।

आज हम आपको ऐसी ही एक कथा के बारे में बता रहें है जिसका संबंध महाभारत(Mahabharat) काल से है ।

बताया जाता है इस तपस्थली को ऋषि-मुनियों ने अपना निवास बनाया और भगवान शंकर(Shankar) को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की।

टपकेश्वर महादेव
टपकेश्वर महादेव

अश्वत्थामा की जन्मस्थली:टपकेश्वर महादेव मंदिर

यह भी माना जाता है कि भारत भ्रमण के दौरान गुरु द्रोणाचार्य(Guru Dronacharya) इस जगह पर आए थे ।

यही पर आचार्य द्रोण ने भगवान शंकर(Shankar) की कृपा प्राप्त करने के लिए तपस्या की थी ।

उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव(Mahadev) ने स्वयं उन्हें यहां अस्त्र-शस्त्र और पूर्ण धनुर्विद्या का ज्ञान दिया।

इसके साथ ही आचार्य द्रोण और उनकी पत्नी कृपि की पूजा-अर्चना से खुश होकर शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया।

द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा(Ashwathama) की जन्मस्थली भी इस स्थान को ही माना जाता है।

मंदिर का मुख्य द्वार बड़े ही सुंदर तरीके से बनाया गया है।

टपकेश्वर महादेव मंदिर का मुख्य द्वार
टपकेश्वर महादेव मंदिर का मुख्य द्वार

यही नहीं मंदिर में आने वाले भक्तों को भोलेनाथ(Bholenath) के अनेंको रूप के दर्शन होते हैं।

इस मंदिर की एक खास बात ये है कि यहां आने वाले भक्त गुफा में प्रवेश करते ही झुक जाते हैं ।

सबसे खास बात ये कि गुफा की दिवारों से पानी की बुंदे गिरती रहती हैं यह पानी कहां से आता है,ये कोई नहीं जानता।

पहाड़ों से गिरती हुई यही पानी की बुंदें महादेव(Mahadev) के पिंड़ी रूप पर गिरती है।

भगवान शिव से जुड़ी कथा (Stories of Lord Shiv)

एक और मान्यता के अनुसार जब अश्वत्थामा(Ashwathama) ने एक बार अपनी माता से दुग्ध पान कराने की जिद की लेकिन माता उन्हें दूध पिलाने में असमर्थ थी।

तब अश्वत्थामा(Ashwathama) ने घोर तप किया और भोलेनाथ ने उनके लिए वरदान के रूप में गुफा से दुग्ध की धारा बहा दी।

टपकेश्वर महादेव
टपकेश्वर महादेव

उस समय गुफा से शिवलिंग(Shivling) पर लगातार दूध की धार टपकती रही और कलियुग में इसने जल का रूप ले लिया।

लगातार शिवलिंग(Shivling) पर जल टपकते रहने के कारण इस मंदिर का नाम टपकेश्वर महादेव मंदिर पड़ गया।

यहाँ के बारे में ऐसा भी माना जाता है कि अश्वत्थामा(Ashwathama) को यहीं भगवान शिव से अमरता का वरदान मिला।

 

॥ जय टपकेश्वर महादेव ॥