अपना व्यक्तित्व कैसे निखार, और लाये जीवन में बहार

बेहतर व्यक्तित्व जन्मजात नहीं होता। एक अच्छा व्यक्ति बनना इंसान के हाथ में होता है। जरूरी नहीं कि उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति बेहतर इंसान हो। तमाम ऐसे लोग भी होते हैं जो बहुत पढ़े-लिखे होने के बावजूद व्यवहार कुशल नहीं होते। उनके व्यक्तित्व का समुचित विकास नहीं हो पाता। ऐसे लोग किसी पार्टी-महफिल या फिर घर-परिवार, दफ्तर में घुल-मिल नहीं पाते। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो बहुत मामूली शिक्षा पाकर भी जीवन में बहुत व्यवहार कुशल होते हैं। इस तरह के लोग पार्टियों की जान होते हैं। इनके बिना कोई सामाजिक कार्य संपन्न नहीं हो पाता। इनकी हर जगह पूछ-परख होती है। उधर, बहुत ज्यादा पढ़-लिखकर भी सम्मान न पाने वाला व्यक्ति ज्यादा प्रसिद्वि न पाने पर कुंठा का शिकार हो सकता है। ऐसे लोग ही साक्षात्कार बोर्ड को संतुष्ट नहीं कर पाते और कई-कई परीक्षाएं उत्तीर्ण करने के बाद भी इंटरव्यू में असफल हो जाते हैं। व्यक्तित्व निर्माण एक सतत प्रक्रिया है। आइए जानते हैं कैसे निखरता है किसी इंसान का व्यक्तित्व यानी पर्सनाल्टी।

आकर्षक व्यक्तित्व

हरदम सिर उठाकर चलें
कई लोग आकर्षक कद-काठी का होने के बावजूद अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाते। वे जब चलते हैं तो सिर झुकाकर,बातें करते हैं तो नजरे झुकाकर। आंखों में आंखें डालकर बात करने में झिझक महसूस होती है। कुछ लोग हाथ को पीछे कमर से बांधकर चलते हैं। तो कुछ पैर पटकते हुए या पैर घिसटकर चलते हैं। इससे उनके थके होने और निरूत्साही होने को पता चलता है। इसलिए चाल ऐसी होनी चाहिए जिसमें आत्मविश्चास झलकता हो। चलते वक्त कदम सीधे और एक दूसरे के सामने पडऩा चाहिए। कंधा,पीठ और गर्दन तने हुए हों। जैसे एक सैनिक चलता है। साक्षात्कार कक्ष में जाते समय और लौटते समय तो अपनी चाल पर जरूर ध्यान रखना चाहिए।

कम बोलें,दूसरों को सुनें
औपचारिक सवाल का जवाब औपचारिक ही होना चाहिए। खुद कम बोलकर दूसरे लोग क्या बोल रहे हैं, उसे ध्यान पूर्वक सुनना चाहिए। बोलते समय ज्यादा उत्तेजित नहीं होना चाहिए।शब्द साफ,आवाज संयत,शालीन और गरिमामय उच्चारण होना चाहिए। अच्छे श्रोता बनें लेकिन ऐसी चुप्पी भी ठीक नहीं कि ऐसा लगे कि आप को कुछ पता ही नहीं। जिस विषय के बारे में पूरी जानकारी नहीं है,उसके बारे में बोलने से अच्छा है चुप रह जाना। इसी तरह यदि अंग्रेजी के शब्दों का अर्थ नहीं पता है तो उसे बोलने से बचें। जो शब्द समझ में नहीं आया फिर से पूछें। साफ तौर बोल सकते हैं कि सवाल हिंदी में पूछें। अंग्रेजी भाषा नहीं आती।

प्रकृति प्रदत्त है सौंदर्य
दरअसल, व्यक्तित्व को निखारना,संवारना और आकर्षक बनाना खुद के हाथ में होता है। आकर्षक व्यक्तित्व की पहचान होती है व्यक्ति के पहनावे से, उसकी बातचीत और उठने-बैठने के तरीके से। तमाम लोग सुंंदरता या फिर गोरे-काले व सांवले रंग को आकर्षक व्यक्तित्व की आइना मानते हैं। लेकिन यह धारणा भी गलत है। गोरा-काला होना या सुंदर-सलोना चेहरा पा लेना किसी के हाथ में नहीं होता। फिर इस बात को लेकर क्यों परेशान होना। प्रकृति ने जैसा बनाया है जो रंग-रूप दिया है, उसी में खुश रहिए। सौंदर्य तो प्रकृति प्रदत्त होता है लेकिन कुरूप होकर भी आकर्षक दिखना और अच्छे व्यक्तित्व का निमार्ण तो हर किसी के बस में होता है। इसलिए याद रखिए, सुंदरता सिर्फ त्वचा की गोरी रंगत और तीखे नाक-नक्श में नहीं है। आकर्षक दिखने के लिए शरीर पर फबने वाली पोषाक जितनी जरूरी है,उतना ही जरूरी है इंसान का आंतरिक व्यक्तित्व।

मुस्कराहट बनावटी न लगे
कुछ लोग जरूरत से ज्यादा गंभीर दिखने की कोशिश में अजीब से चेहरा बना लेते हैं। तो कुछ लोग ज्यादा प्रभावशाली दिखने में चक्कर में अनावश्यक रूप से मुस्कराते हुए दिखते हैं। ऐसे लोगों की मुस्कराहट बनावटी लगती है। यह अच्छे व्यक्तित्व की निशानी नहीं है। गंभीर विषयों पर बात करते समय मुस्कराहट ठीक नहीं। जहां जरूरत हो वहां हल्की सी मुस्कराहट दें। मुंह खोलकर जम्हाई लेने से भी बचना चाहिए। किसी से मिलें तो उसका गर्मजोशी से स्वागत करें। ठंडेपन से मिलने पर लगता है आप मिलकर खुश नहीं हुए। इसलिए जब किसी से मिलें तो ऐसा लगना चाहिए कि आप दुनिया के सबसे खुशमिजाज इंसान हैं।

खुश दिखें और संतुष्टि का भाव हो
आप संकटों से घिरे हैं। परेशानियां पीछा नहीं छोड़तीं। यह आपका दुर्भाग्य है। इससे किसी को सहानुभूति तो हो सकती है। लेकिन निपटना आपको को ही है। इसलिए बेवजह अपनी परेशानियां का पिटारा किसी के सामने खोलकर न बैठ जाएं। सदैव सकारात्मक सोचें। जिंदगी से निराश होकर बैठ जाने का मतलब है हीनभावना का शिकार होना और अपना आत्मविश्वास गवां बैठना। जब परेशानियों से घिरे हो तो सफल और आशावादी लोगों से मेल जोल ज्यादा बढ़ा दें। निराशावादियों से बचें। ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखें जो हरदम नकारात्मक बातें करते हैं या जिनका निगेटिव एटीट्यूड है। जिंदगी में जो नहीं मिला या जिसे आपने गंवा दिया उसे हासिल करने की कोशिश करें। लेकिन उसकी चिंता की लकीरें चेहरे पर नहीं दिखनी चाहिए। कुछ गवां चुके हैं तो नए सिरे से जिंदगी जीने की कोशिश करें। रचनात्मक सोचने से नई ऊर्जा मिलती है। इसलिए कुछ नया सोचते रहें। समाजसेवा और पड़ोसियों की मदद भी ऊर्जावान बनाती है। इसलिए जब भी मौका मिले, समाजसेवा करें और इसके लिए समय निकालें। प्रकृति के नजदीक रहने से भी खुशमिजाज व्यक्तित्व का निमार्ण होता है। इसलिए पहाड़ों और जंगलों,नदियों और बागों की तरफ घूमने के लिए समय निकालें। इससे आप खुश दिखेंगे और आपमें संतुष्टि का भाव दिखेगा। आपका यह व्यक्तित्व न केवल साक्षात्कार में आपको सफलता दिलाएगा बल्कि सफल जीवन जीने में भी मददगार होगा।

कैसे पाएँ आकर्षक व्यक्तित्व :-
* आपके कपड़े हमेशा साफ-सुथरे होना चाहिए। तड़कीले-भड़कीले या मैले कपड़े न पहनें।
* आपकी वाणी में मिठास व व्यवहार में शिष्टाचार होना चाहिए।
* कंधे या गर्दन झुकाकर नहीं चलें।
* स्टाइलिश दिखने के चक्कर में ज्यादा हाई हील न पहनें।
* चलते समय आगे-पीछे मुड़कर न देखें।

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