पापो से मुक्ति पाने के लिए ज़रूर करे योगिनी एकदशी का व्रत :

आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम योगिनी एकादशी होता है । योगिनी एकदशी के व्रत से पापो से छुटकारा मिलता है। यह एकदशी व्रत इकलौते में भोग तथा परलोक में मुक्ति दिलाने वाला होता है । भगवान श्री हरि की पूजा करने के लिए योगिनी एकदशी सबसे शुभ मानी जाती है । योगिनी एकादशी से मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।

योगिनी एकादशी से जुड़ी एक कथा का पद्मपुराण में उल्लेख है । पद्मपुराण अनुसार भगवान शिव के परम भक्त धनाध्यक्ष है । भगवान शिव की पूजा करने के लिए इन्होंने हेम नाम के माली को फूल चुनकर लाने का काम सोप रखा था । एक दिन माली ने काम से वशीभूत होकर अपनी पत्नी के साथ विहार पर चला गया और पुष्प समय पर नही लाया । इससे कुबेर को क्रोध आया और उन्होंने अपने सैनिकों को माली के घर भेज दिया । इसके पश्च्यात कुबेर महाराज ने माली को श्राप दे दिया । श्राप यह था कि हेम कुष्ट रोग से पीड़ित होकर अपनी पत्नी के साथ धरती पर चला जाये । पृथ्वी पर आने पर ऋषि ने हेम के दुख का कारण जानकर उसे योगिनी व्रत करने को कहा था ।योगिणी एकदशी से माली का श्राप दूर हुआ तथा वह पाप मुक्त हो गया।

योगिनी एकादशी के दिन करे ये जाप :
मम सकल पापक्षयपूर्वक कुष्ठादिरोग।
निवृत्तिकामनया योगिन्येकादशीव्रतमहं करिष्ये।
योगिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि :
योगिनी एकदशी के दिन प्रातः में स्नान कर ले और स्वच्छ वस्त्र धारण कर ले । इसके पश्चात एक पटिये पर लाल कपड़ा बिछा कर भगवान श्री हरि की मूर्ति स्थापित करे । फिर भगवान को अक्षत , नारियल तथा तुलसी पत्ता अर्पित करे । योगिनी एकदशी के दिन पीपल के पेड़ को पूजा करना न भूले । इस दिन योगिनी एकादशी की कथा सुने और अगले दिन परायण कर ले ।