आज पढ़ें सोमवार को ही क्यों की जाती है शिवलिंग की पूजा!!!

आखिर सोमवार को ही क्यों की जाती है शिवलिंग की पूजा ?

पुरातन काल से हीं भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व रहा है। इसके लिए सोमवार के दिन को सबसे शुभ और कल्याणकारी माना गया है।पुराणों में सोमवार को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे उपयुक्त और मनोकामना पूर्ण करने वाला दिन बताया गया है।

सोमवार को ही क्यों की जाती है शिवलिंग की पूजा!!!
सोमवार को ही क्यों की जाती है शिवलिंग की पूजा!!!

कहा जाता है कि सोमवार को जो भी व्यक्ति शिव की आराधना सच्चे दिल से और निष्ठापूर्वक करता है, भगवान भोलेनाथ उनकी सारी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।

क्यों करते है शिवलिंग की पूजा ?

वस्तुतः व्यवहार में लिंग का अर्थ शिश्न या योनि के रूप में किया जाता है परन्तु यह अर्थ केवल अज्ञानतावश ही किया जाता है। संस्कृत में तीन लिंग पुरुषलिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग होता है। वस्तुतः यहाँ पर लिंग शब्द का अर्थ प्रतीक के रूप में है। अर्थात लिंग पुरुष,स्त्री था नपुंसकता का प्रतीक है। उसी प्रकार शिवलिंग में लिंग शब्द शिवत्व का प्रतीक है।

भगवान शिव स्वयं शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष है इसलिए शिवलिंग तो शून्याकाश आदि का ही प्रतीक है न की अज्ञानी पुरुष का लिंग। स्कन्दपुराण के अनुसार आकाश स्वयं लिंग ही है, पृथ्वी उसका पृष्ठ या आधार है तथा ब्रह्माण्ड का हर पदार्थ अनन्त शून्य से उत्पन्न  होकर अंततः उसी में लय हो जाने के कारण इसे लिंग कहा है| यही कारण है की प्राचीन काल से ही शिवलिंग की पूजा अनवरत अविरल रूप से चली आ रही है। अतः स्पष्ट है की शिव ही शिवलिंग है और शिवलिंग ही शिव हैं।

सोमवार और शिव जी का सम्बन्ध

सोमवार दिन का प्रतिनिधि ग्रह चन्द्रमा है। चन्द्रमा मन का कारक है ( चंद्रमा मनसो जात: )। मन के नियंत्रण और नियमण में उसका (चंद्रमा का) महत्त्वपूर्ण योगदान है। चन्द्रमा भगवान शिव जी  के मस्तक पर विराजमान है। भगवान शिव  स्वयं साधक व भक्त के चंद्रमा अर्थात मन को नियंत्रित करते हैं। इस प्रकार भक्त के मन को वश में तथा एकाग्रचित कर अज्ञानता के भाव सागर से बाहर निकालते है।

 शिवलिंग की पूजा
शिवलिंग की पूजा

महादेव की कृपा से भक्त त्रिविध ताप आध्यात्मिक, आधिभौतिक तथा आधिदैविक  ( 1 आध्यात्मिक :- जो आत्मिक देह में अविद्या,राग, द्वेष, मुर्खता 2. अधिभौतिक :- शत्रु या व्याघ्र से दुःख  3 अधिदैविक :-  अतिवृष्टि, अतिशीत, अति उष्णता आदि से मन और इन्द्रियों को दुःख पहुंचना ) से शीघ्र ही मुक्ति पाते है। यही कारण है की सोमवार दिन शिवजी के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।

शिव पूजन के लिए सामग्री

शिवजी की पूजा में मुख्य रूप से निम्न सामग्री का प्रयोग किया जाता है। गंगाजल, जल, दूध, दही,  घी, शहद,चीनी, पंचामृत, कलावा, जनेऊ, वस्त्र, चन्दन, रोली, चावल, बिल्वपत्र, दूर्वा, फूल,फल, विजिया, आक, धूतूरा, कमल−गट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, धूप, दीप तथा नैवेद्य  का इस्तेमाल किया जाता है।

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