वाल्मीकि रामायण की कुछ रोचक और अनसुनी बातें..!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

भगवान राम(Ram) को समर्पित महाकाव्य रामायण वस्तुतः २ महर्षि ने लिखी है, एक तुलसीदास(Tulsidas) द्वारा रचित है ‘श्री रामचरित मानस’ (Ramcharitmanas) तथा दूसरी महर्षि वाल्मीकि कृत ‘रामायण’(Ramayan)। यहाँ बात करते है की ऐसा बहुत कम लोग जानते है की श्री रामचरित मानस(Ramcharitmanas) और रामायण(Ramayan) में कुछ बातें अलग है जबकि कुछ बातें ऐसी है जिनका वर्णन केवल वाल्मीकि रामायण में है।

वाल्मीकि रामायण की कुछ रोचक और अनसुनी बातें
वाल्मीकि रामायण की कुछ रोचक और अनसुनी बातें

तो आज इस लेख के द्वारा हम आपको महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण(Ramayan) की कुछ ऐसी ही बातों के बारे में बताएँगे जो शायद आपने नहीं सुनी होगी तथा जिनको पढ़कर आपको हैरानी जरूर होगी।

धार्मिक कथा ( Religious Story)

  • हिंदू धर्म में तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं की मान्यता है।

रामायण(Ramayan) के अरण्यकांड के चौदहवे सर्ग के चौदहवे श्लोक में सिर्फ तैंतीस देवता(Devta) ही बताए गए हैं।

  • रघुवंश में एक परम प्रतापी राजा हुए थे, जिनका नाम अनरण्य था।

जब रावण(Ravan) विश्वविजय करने निकला तो राजा अनरण्य से उसका भयंकर युद्ध हुआ।

उस युद्ध में राजा अनरण्य की मृत्यु हो गई, लेकिन मरने से पहले उन्होंने रावण(Ravan) को श्राप दिया कि मेरे ही वंश में उत्पन्न एक युवक तेरी मृत्यु का कारण बनेगा।

वाल्मीकि रामायण की कुछ रोचक और अनसुनी बातें
वाल्मीकि रामायण की कुछ रोचक और अनसुनी बातें
  • विश्व विजय करने के लिए जब रावण(Ravan) स्वर्ग लोक पहुंचा तो उसे वहां रंभा नाम की अप्सरा दिखाई दी।

अपनी वासना पूरी करने के लिए रावण(Ravan)ने उसे पकड़ लिया।

तब उस अप्सरा ने कहा कि आप मुझे इस तरह से स्पर्श न करें, मैं आपके बड़े भाई कुबेर(Kuber) के बेटे नलकुबेर के लिए आरक्षित हूं।

वाल्मीकि रामायण की कुछ रोचक और अनसुनी बातें
वाल्मीकि रामायण की कुछ रोचक और अनसुनी बातें

इसलिए मैं आपकी पुत्रवधू के समान हूं।

लेकिन रावण(Ravan) नहीं माना और उसने रंभा से दुराचार किया।

यह बात जब नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण(Ravan) को श्राप दिया कि आज के बाद रावण(Ravan) बिना किसी स्त्री की इच्छा के उसे स्पर्श करेगा तो उसका मस्तक सौ टुकड़ों में बंट जाएगा।

वाल्मीकि रामायण की बातें

  • एक बार रावण(Ravan) यमलोक जा पहुंचा।

वहां रावण(Ravan) और यमराज(Yamraaj) के बीच भयंकर युद्ध हुआ।

जब यमराज(Yamraaj) ने कालदंड के प्रयोग द्वारा रावण(Ravan) के प्राण लेने चाहे तो ब्रह्मा ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया क्योंकि किसी देवता द्वारा रावण(Ravan) का वध संभव नहीं था।

इसलिए भगवान्(Bhagwaan) राम(Ram) ने मानव रूप में रावण(Ravan) का वध किया था।

वाल्मीकि रामायण
वाल्मीकि रामायण
  • सीता(Seeta)हरण करते समय जटायु नामक गिद्ध ने रावण(Ravan) को रोकने का प्रयास किया था।

रामायण(Ramayan) के अनुसार जटायु के पिता अरुण बताए गए हैं। ये अरुण ही भगवान सूर्यदेव(Suryadev) के रथ के सारथी हैं।

वाल्मीकि रामायण की अन्य अनसुनी बातें

  • जिस दिन रावण(Ravan) सीता(Seeta) का हरण कर अपनी अशोक वाटिका में लाया।

उसी रात को भगवान ब्रह्मा के कहने पर देवराज इंद्र माता सीता(Seeta) के लिए खीर लेकर आए।

पहले देवराज ने अशोक वाटिका में उपस्थित सभी राक्षसों को मोहित कर सुला दिया।

उसके बाद माता सीता(Seeta) को खीर अर्पित की।

जिसके खाने से सीता की भूख-प्यास शांत हो गई।

  • रावण(Ravan) ने अपनी पत्नी की बड़ी बहन माया के साथ भी छल किया था।
  • माया के पति वैजयंतपुर के शंभर राजा थे।
वाल्मीकि रामायण की कुछ रोचक और अनसुनी बातें
वाल्मीकि रामायण की कुछ रोचक और अनसुनी बातें

एक दिन रावण(Ravan) शंभर के यहां गया।

वहां रावण(Ravan) ने माया को अपनी बातों में फंसा लिया।

इस बात का पता लगते ही शंभर ने रावण(Ravan) को बंदी बना लिया।

उसी समय शंभर पर राजा दशरथ(Dashrath) ने आक्रमण कर दिया। उस युद्ध में शंभर की मृत्यु हो गई।

जब माया सती होने लगी तो रावण(Ravan) ने उसे अपने साथ चलने को कहा।

माया ने कहा कि तुमने वासनायुक्त मेरा सतित्व भंग करने का प्रयास किया इसलिए मेरे पति की मृत्यु हो गई।

अत: तुम्हारी मृत्यु(Mrityu) भी इसी कारण होगी।

  • काफी समय तक राम-रावण का युद्ध चलता रहा।

तब अगस्त्य मुनि ने श्रीराम(Shri Ram) से आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करने को कहा।

जिसके प्रभाव से भगवान श्रीराम(Shri Ram) ने रावण का वध किया।

 

॥जय श्री राम ॥

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