प्रभु श्रीराम को दिया था एक अप्सरा ने श्राप , पढ़े एक परौनिक कथा :

विष्णु के सातवें अवतार भगवान श्रीराम को जीवन से जुड़े कई किस्से कहानिया हैं। उनमें से एक किस्सा के बारे में आप शायद ही जानते होंगे। यह किसा जुड़ा है उसके द्वारा सुग्रीव के भाई बालि का वध करने वाले से जुड़ा है ।

 
देवराज इंद्र का पुत्र तथा किष्किंधा का राजा बालि या बाली जिससे भी लड़ता था लड़ने वाला कितना ही शक्तिशाली हो उसकी आधी शक्ति बाली में समा जाती थी और लड़ने वाला कमजोर होकर मारा जाता था। बाली ने सुग्रीव की पत्नी एवं संपत्ति हड़पकर उसको राज्य से बाहर धकेल दिया था। यही कारण था कि प्रभु श्रीराम ने सुग्रीव से अपने बड़े भाई बाली से युद्ध करने को कहा और इस दौरान श्रीराम ने छुपकर बाली पर तीर चला दिया और वह मारा गया।

मरते वक्त बाली नेअपने पुत्र अंगद को तीन तरह की शिक्षा दी थी। बालि ने कहा, पहली बात ध्यान रखना देश, काल तथा परिस्थितियों को हमेशा समझकर कार्य करना। दूसरी बात यह कि किसके साथ कब, कहां तथा कैसा व्यवहार करें, इसका सही निर्णय लेना। अंत में बालि ने तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात कही कि पसंद-नापसंद, सुख-दु:ख को सहन करना तथा क्षमाभाव के साथ जीवन व्यतीत करना। यह जीवन का सार है।
 

 बाली के वध के बाद उसकी पत्नी तारा बहुत दुखी हुई। तारा , अप्सरा थी। बाली को छल से मारा गया। यह जानकर उनकी पत्नी तारा ने श्रीराम को कोसा तथा उन्हें एक श्राप दिया। श्राप के मुताबिक भगवान राम अपनी पत्नी सीता को पाने के बाद जल्द ही खो देंगे। उसने यह भी कहा कि अगले जन्म में उनकी मृत्यु उसी के पति (बाली) द्वारा होगी। अगले जन्म में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था तथा उनके इस अवतार का अंत एक शिकारी भील जरा (जो कि बाली का ही दूसरा जन्म था) द्वारा किया गया था।