16 दिन श्राद्ध पक्ष में भूलकर भी ना करें ये गलती, वरना चुकाना पड़ सकती है बड़ी कीमत..!!!

16 दिन श्राद्ध पक्ष
16 दिन श्राद्ध पक्ष

पितृपक्ष में श्रद्धापूर्वक पिंडदान, अन्नदान और वस्त्रदान करके ब्राह्मणों से विधिपूर्वक श्राद्ध कराते है तो पितर की आत्मा को मोक्ष मिलता है। आज हम बात कर रहें है पितृपक्ष में हमें ध्यान रखना चाहिए की हमसे कोई गलती न हो वर्ना हमें नरक भोगना पड सकता है।

इनका रखें विशेष ध्यान

  • ध्यान रखिये पितरों के निमित्त सारी क्रियाएं दक्षिण की ओर मुख करके की जाती है।
  • श्राद्ध का समय हमेशा जब सूर्य की छाया पैरो पर पड़ने लग जाए अर्थात दोपहर के बाद ही शास्त्र सम्मत है। सुबह-सुबह अथवा 12 बजे से पहले किया गया श्राद्ध पितरों तक नहीं पहुंचता है।

  • महिलाएं जल अर्पण, श्राद्ध या पंडित को भोजन देते समय बाल खुले न रखें।
  • अपने पितरों को जल अर्पण कर श्राद्ध, पिंडदान या पंडित को भोजन देने वाले पुरुष पान मसाला, तंबाकू, शराब, मांस से दूर रहें।
  • बता दें श्राद्ध के नाम पर सुबह सुबह हलवा पूरी बनाकर और थाली बनाकर मन्दिर में पंडित को देने से श्राद्ध का फर्ज पूरा नहीं होता है। ऐसे श्राद्धकर्ता को उसके पितृगण कोसते हैं क्योंकि उस थाली को पंडित भी नहीं खाता है बल्कि कूड़ेदान में फेंक देता है। जहां सूअर, आवारा कुत्ते और पशु आदि उसे खाते हैं।

  • श्राद्ध में ध्यान रखना चाहिए कि इन दिनों लहसुन, प्याज रहित सात्विक भोजन ही घर की रसोई में बनना चाहिए। जिसमें उड़द की दाल, बडे, चावल, दूध, घी से बने पकवान, खीर, मौसमी सब्जी जैसे तोरई, लौकी, सीतफल, भिण्डी कच्चे केले की सब्जी ही भोजन में मान्य है। आलू, मूली, बैंगन, अरबी तथा जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां पितरों को नहीं चढ़ती है।
  • जल अर्पण के साथ भोजन में काले तिल का उपयोग अवश्य करें। पंडित को साफ आसन पर मौन होकर भोजन परोसें। मेज-कुर्सी का उपयोग न करें।

 

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