पढ़िए किन लोगों को है श्राद्ध करने की इज़ाज़त..!!!

पढ़िए किन लोगों को है श्राद्ध करने की इज़ाज़त..!!!

श्राद्ध का अधिकार पुत्र को प्राप्त है
श्राद्ध का अधिकार पुत्र को प्राप्त है

हमारी संस्कृति में पितरों को देवतुल्य माना गया है। अश्विन कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अमावस्या 16 दिन पितृपक्ष के नाम से जाना जाता है। इन दिनों में लोग अपने पितरों (पूर्वजों) को जल अर्पित करते हैं व उनकी मृत्युतिथि पर श्राद्ध करते हैं। ऐसे में आज हम आपको बता रहें है किन लोगों को श्राद्ध की इज़ाज़त है।

  • श्राद्ध का अधिकार पुत्र को प्राप्त है।

  • यदि पुत्र जीवित न हो तो पौत्र, प्रपौत्र या विधवा पत्नी भी श्राद्ध कर सकती है।
  • पुत्र के न रहने पर पत्नी का श्राद्ध पति भी कर सकता है।
  • यदि पिता के अनेक पुत्र हों तो ज्येष्ठ पुत्र को श्राद्ध करना चाहिए।
  • यदि सभी भाई अलग-अलग रहते हों तो वे भी अपने-अपने घरों में श्राद्ध का कार्य कर सकते हैं।

  • पुत्र परंपरा के अभाव में भाई तथा उनके पुत्र भी श्राद्ध का कार्य कर सकते हैं।
  • यदि कोई भी उत्तराधिकारी न हो तो प्रपौत्र या परिवार का कोई भी व्यक्ति श्राद्ध कर सकता है।
  • तर्पण तथा पिंडदान केवल पिता के लिए ही नहीं बल्कि समस्त पूर्वजों एवं मृत परिजनों के लिए भी किया जाता है।
  • समस्त कुल, परिवार तथा ऐसे लोगों को भी जल दिया जाता है, जिन्हें जल देने वाला कोई न हो।
  • पितृपक्ष में पिंडदान मृत्युतिथि के दिन ही किया जाता है।

  • जिन लोगों की मृत्यु की तिथि ज्ञात न हो उनका श्राद्ध अमावस्या को करना चाहिए।
  • पितृपक्ष में श्राद्ध करने वाले पुरुष और उसकी पत्नी को सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए।
  • इस दौरान नए वस्त्र, आभूषण आदि की खरीदारी और उपयोग भी वर्जित माना गया है।