आज जानिए क्यों शिव शंकर को पशुपति भी कहा जाता है…!!!

आज जानिए क्यों शिव शंकर को पशुपति भी कहा जाता है…!!!

शिव को महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ के नाम से जाना जाता है ये तो आप सभी जानते ही है पर भोले बाबा का एक नाम पशुपति भी है । महादेव हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं। हिंदू धर्म ग्रंथ पुराणों के अनुसार भगवान शिव ही समस्त सृष्टि के आदि कारण हैं। उन्हीं से ब्रह्मा, विष्णु सहित समस्त सृष्टि का उद्भव होता हैं।भगवान शिव की हर लीला अपरम पार है उनके कई स्वरुप है और कहा जाता है वे रूप रहित हैं। अर्थात् शिव अनन्त हैं, असीम हैं। उनमें किसी बात की अभिलाषा नहीं है। वह दयालु भी हैं तथा क्रोध आने पर रौद्र रूप भी दिखा सकते हैं।अब जानते है पशुपति नाम कैसे पड़ा,इसका अर्थ क्या है । ब्रह्मा से लेकर स्थावर-जंगमपर्यन्त जितने भी जीव हैं, सभी देवाधिदेव शूलपाणि शिव के पशु माने गए हैं। जीव मायापाश में बंधा रहता है और सुख-दु:खरूपी चारा खाता है। भगवान की लीलाओं का साधन जीव ही है। इसलिए जीव ‘पशु’ है और उसका पति (रक्षक) ‘ईश’ है, ब्रह्म है। भगवान शिव सबको ज्ञान देने वाले और अज्ञान से बचाने वाले हैं, इसलिए वे ‘पशुपति’ कहलाते हैं।

भगवान शिव को पशुपति इसलिए भी कहते है क्योंकि सब जीवों के स्वामी हैं क्योंकि वे गतात्माओं के भी स्वामी हैं। ये महादेव यानी देवताओं के भी देव हैं। वे सुरगण के भी देव हैं तथा दैत्यों के भी देव हैं। इसलिए दशानन (रावण) ने शिव की पूजा करके अपने दसों सिर का बलिदान करके भगवान शिव से वरदान प्राप्त किया था। भगवान शिव सृष्टि कर्ता भी हैं तथा संहारक भी हैं।

 

॥ जय पशुपति नाथ ॥

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