जानिए इस शिव मंदिर के चमत्कार, जहाँ मेंढक पर विराजित हे भगवान शिव…!

भगवान शिव के इस दुनिया में अनेक चमत्कारी मंदिर हे| आज हम आपको शिव के एक और अनोखे चमत्कारी मंदिर से परिचित कराने जा रहे हे| यह शिव मंदिर लखीमपुर खीरी जिले में स्थित हे| इस मंदिर की ख़ास बात यह हे की यहाँ पर शिव जी मूर्ति मेंढक के ऊपर विराजित हे| यह मंदिर ओयल कस्बे जो की जिला मुख्यालय से 12 की.मी. की दुरी पर स्थित हे| यहां नर्मदेश्वर महादेव का शिवलिंग रंग बदलता है, जो की भक्तो में एक चर्चा का विषय बना हुआ हे| यहा पर खड़ी नंदी की मूर्ति भी मंदिर की विशेषता का कारन हे|

मेंढक की पर विराजिटी हे शिव

जब हमने इतिहासकार माणिक लाल से मंदिर के बारे में जानना चाहा तो उनका कहना था की “मंदिर राजस्थानी स्थापत्य कला पर बना है, और तांत्रिक मण्डूक तंत्र पर बना है| मंदिर के बाहरी दीवारों पर शव साधना करती उत्कीर्ण मूर्तियां इसे तांत्रिक मंदिर ही बताती हैं| सामने से मेंढक के पीठ पर करीब सौ फिट का ये मन्दिर अपनी स्थापत्य के लिए यूपी ही नहीं पूरे देश के शिव मंदिर में सबसे अलग है|” शिव जी के इस मंदिर को वहा के लोग उनके प्रदेश का गोरव मानते हे|

मंदिर का शिवलिंग भी बेहद खूबसूरत है और संगमरमर के कसीदेकारी से बनी ऊंची शिला पर विराजमान है| नर्मदा नदी से लाया गया शिवलिंग भी भगवान नर्मदेश्वर के नाम से विख्यात हैं| बेहद खूबसूरत और अदभुत मेंढक मंदिर को यूपी की पर्यटन विभाग ने भी चिन्हित कर रखा है| दुधवा टाइगर रिजर्व कॉरीडोर में इस मंदिर को भी विश्व मानचित्र पर लाने के प्रयास जारी हैं| ऑयल कसबे के इस अनोखे शिव मंदिर को मेंढक मंदिर नाम से भी जाना जाता हे|

भोलेनाथ के मंदिर में जलाभिषेक करने दूर-दूर से भक्त सावन माह में आते हे| यह मंदिर 200 साल पुराना हे और इसे ऑयल के राजा बख्त सिंह ने बनवाया था| रामपाल सिंह जो की इतिहास के जानकार मने जाते हे, उनके अनुसार यह मंदिर बनवाने के दो कारन हे|पहला ये की ऑयल के राजा ने यह मंदिर युद्ध में जीते हुए धन को सदुपयोग में लेन के लिये बनवाया गया था और दुसरा कारन ये भी माना जाता हे की किसी तांत्रिक की सलाह पर आकाल से निपटने के लिए यह मंदिर बनवाया गया था|

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