जानिए क्यों भगवान शिव पहनते है उनकी पसंदीदा बाघ की खाल..!!!

शिव शंकर भोलेनाथ के पास रहने वाली हर एक चीज का अपना अलग ही महत्व है। फिर उनके त्रिनेत्र हों, डमरू हो, त्रिशूल हो गले,में साप हो, वाहन के रूप में नंदी हो या फिर बाघ की खाल। आपने जब भी भगवान शिव का चित्र देखा होगा उसमें उनको बाघ की खाल पहने हुए ही देखा होगा इसलिए आज हम आपको पौराणिक कहानी के जरिये ये बताएंगे कि भगवान शिव तस्वीरों में हमेशा बाघ की खाल के साथ ही क्यों नजर आते हैं। दरअसल बता दें धर्म

भोलेनाथ बाघ की खाल पहने हुए
भोलेनाथ बाघ की खाल पहने हुए

ग्रंथों में इसके पीछे एक पौराणिक कहानी है।

पौराणिक कथा के अनुसार एक समय की बात है एक दिन श्री हरि विष्णु ने हिरण्याकश्यिप का वध करने के लिए नरसिंह अवतार धारण किया था नरसिंह अवतार में वे आधे नर और आधे सिंह के रूप में अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए किया था। पुराणों में उल्लेख है कि भगवान विष्णु, भगवान

शिव को उस समय एक अनोखा उपहार देना चाहते थे।

हिरण्याकश्यप का वध करने के बाद नरसिंह अवतार लिए भगवान विष्णु बहुत क्रोध में थे। तब भोलेनाथ ने अपने अंश वीरभद्र को उत्पन्न कर वीरभद्र से कहा कि तुम जाकर विष्णु अवतार नृसिंह से निवेदन करो कि वह अपना क्रोध त्याग दे। जब नृसिंह भगवान नहीं माने तब वीरभद्र ने शरभ रूप धारण किया।

महादेव तपस्या में लीन
महादेव तपस्या में लीन

नृसिंह को वश में करने के लिए वीरभद्र गरुड़, सिंह और मनुष्य का मिश्रित रूप धारण किये और शरभ कहलाए। शरभ ने नृसिंह भगवान को अपने पंजे से उठा लिया और चोंच से वार करने लगे। उनके वार से घायल होकर नृसिंह ने अपना शरीर त्यागने का निर्णय लिया और भगवान शिव से निवेदन किया कि, भगवान शिव अपने आसन के रूप नरसिंह की चर्म को स्वीकार करें।

इसके बाद नृसिंह, भगवान विष्णु के शरीर में मिल गए और भगवान शिव ने इनके चर्म को अपना आसन बना लिया इसलिए भगवान भोलेनाथ बाघ की खाल पर विराजते हैं और यह वजह है कि बाघ की खाल हमेशा भगवान शिव के पास रहती है।

तो अब तो आप जान गए न क्यों प्रिय है शिवजी को बाघ की खाल ।

॥ जय महाकाल ॥

 

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