शिव और शमशान का क्यों है गहरा रिश्ता..!!जरूर पढ़िए..!!

शिव और शमशान का क्यों है गहरा रिश्ता..!!जरूर पढ़िए..!!

शिव और शमशान का क्यों है गहरा रिश्ता
शिव और शमशान का क्यों है गहरा रिश्ता

भगवान शंकर जितने भोले है उतने रहस्यमयी भी हैं,उनके बारे में संपूर्ण पता लगाना असंभव है  उनकी वेश-भूषा व उनसे जुड़े तथ्य भी उतने ही विचित्र है। शिव श्मशान में निवास करते हैं, गले में नाग धारण करते हैं, भांग व धतूरा ग्रहण करते हैं। आदि न जाने कितने रोचक तथ्य इनके साथ जुड़े हैं। आज हम आपको भगवान शिव से जुड़ी ऐसी ही रोचक बात बता रहे है आखिर क्यों शिव को शमशान में रहना पसंद है क्या है शिव और शमशान का रिश्ता।

भगवान शिव श्मशान में निवास करते हैं। भगवान शिव के सांसारिक होते हुए भी श्मशान में निवास करने के पीछे एक गूढ़ सूत्र छिपा है। संसार मोह-माया का प्रतीक है जबकि श्मशान वैराग्य का।भगवान शिव कहते हैं कि संसार में रहते हुए अपने कर्तव्य पूरे करो, लेकिन मोह-माया से दूर रहो। क्योंकि ये संसार तो नश्वर है। एक न एक दिन ये सबकुछ नष्ट होने वाला है। इसलिए संसार में रहते हुए भी किसी से मोह मत रखो और अपने कर्तव्य पूरे करते हुए वैरागी की तरह आचरण करो।

यूं तो शिव की महिमा को शब्दों में पिरोना असंभव है, क्योंकि वो अनादि हैं, महाकाल हैं, विश्वेश्वर हैं। शिव सर्वस्व हैं और जो शिव को नहीं जान पाता वो तो शव ही है। शंभू यानि स्वयंभू की यात्रा स्वयं से ही आरंभ होती है। शिव और आपके एकाकार हो जाने को ही आप शिवोहं कहते हैं। शिव को स्वरूप में बांधना संभव नहीं क्योंकि वो महाकाल है और अनादि हैं।इसलिए शिवजी शमशान में रहकर सांसारिक प्राणियों को शिक्षा देते है की यह जगत शमशान ही है काशी महान शमशान है यह शरीर, घर सब शमशान है।इस प्रकार शमशान का अर्थ है सारा जगत अर्थात संसार की सभी वस्तुयों में शिव विद्यमान है।

 

॥ हर हर महादेव ॥

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