शनिदेव के स्थान पर , मूर्ति स्थापित न करके एक पत्थर को क्यों पूजते लोग हैं ?

महीने के चारों शनिवार और अमावस्या के दिन यहां प्रातः काल से ही भक्तों का जमावड़ा लगा होता है। शनिदेव महाराज के दर्शन के लिए मंदिर में जाते समय सामने की तरह ही देखें, पीछे मुड़ने पर मनाही है और मंदिर के अंदर केवल पुरुषों का जाना ही अनिवार्य है महिलाएं बाहर से ही पूजा करती है।

एक ऐसा शहर जहां लोगो के घरों में कभी ताला नही लगाया जाता है हर समय वहां लोगो ने खुद को सुरक्षित महसूस किया। आज हम बात कर रहे है मुम्बई के अहमदनगर ज़िला में स्थित प्राचीन प्रसिद्ध शनि मंदिर “शनि शिंगणापुर” की। ऐसा माना जाता है कि शिंगणापुर गांव में कभी भी एक सामान तक की चोरी नहीं हुई, शनि महाराज की यहां अपार कृपा है जो सालों से इस गांव के लोगों पर बरस रही है। मनुष्य के जीवन में दुःखों की समस्या रहती है, यदि आपने एक बार भी इस प्राचीन मंदिर में शनि महाराज के दर्शन पा लिए तो जीवन मे तमाम उलझनों से आपको मुक्ति मिल जाएगी।

महीने के चारों शनिवार और अमावस्या के दिन यहां प्रातः काल से ही भक्तों का जमावड़ा लगा होता है। शनिदेव महाराज के दर्शन के लिए मंदिर में जाते समय सामने की तरह ही देखें, पीछे मुड़ने पर मनाही है और मंदिर के अंदर केवल पुरुषों का जाना ही अनिवार्य है महिलाएं बाहर से ही पूजा करती है।

एक ऐसा शहर जहां लोगो के घरों में कभी ताला नही लगाया जाता है हर समय वहां लोगो ने खुद को सुरक्षित महसूस किया। आज हम बात कर रहे है मुम्बई के अहमदनगर ज़िला में स्थित प्राचीन प्रसिद्ध शनि मंदिर “शनि शिंगणापुर” की। ऐसा माना जाता है कि शिंगणापुर गांव में कभी भी एक सामान तक की चोरी नहीं हुई, शनि महाराज की यहां अपार कृपा है जो सालों से इस गांव के लोगों पर बरस रही है। मनुष्य के जीवन में दुःखों की समस्या रहती है, यदि आपने एक बार भी इस प्राचीन मंदिर में शनि महाराज के दर्शन पा लिए तो जीवन मे तमाम उलझनों से आपको मुक्ति मिल जाएगी।

शिंगणापुर गांव में पड़ने वाली सूर्य की पहली किरण के स्थान पर उस आकृति को प्राण-प्रतिष्ठा के साथ स्थापित किया। तब शनिदेव जी ने सबको आशीर्वाद दिया और वरदान दिया कि इस गांव की रक्षा अब मेरे द्वारा की जाएगी उसके पश्चात ही सभी शिंगणापुर वासियों ने यह प्रण लिया कि आज से किसी के भी घर मे मुख्य दरवाज़ा नहीं होगा क्योंकि अब हमारे लिए हमारे साथ शनिदेव जी का आशीर्वाद है। देश-विदेश से कितने ही भक्त शनि महाराज के दर्शन करने आते है महीने के चारों शनिवार और अमावस्या के दिन यहां प्रातः काल से ही भक्तों का जमावड़ा लगा होता है। इस मंदिर के प्रावधान में यह भी कहा गया है कि शनिदेव महाराज के दर्शन के लिए मंदिर में जाते समय सामने की तरह ही देखें, पीछे मुड़ने पर मनाही है और मंदिर के अंदर केवल पुरुषों का जाना ही अनिवार्य है महिलाएं बाहर से ही पूजन पाठ करती है। श्रद्धालु शनिदेव की छवि पर तेल चढ़ाते है तथा उनका आशीर्वाद पाते है। सच्चे मन से गए हुए श्रद्धालुओं के जीवन के सारे कष्ट खत्म हो जाते है तथा जो पहली बार उनके दर्शन करने जाता है वो ये सब देख के ही शनिदेव में मग्न हो जाता है।