श्राद्ध : जानिए सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध में क्या-क्या करना चाहिए !!

पितरों को विदा करने की अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या होती है। 15 दिन तक पितृ घर में विराजते हैं तथा हम उनकी सेवा करते हैं फिर उनकी विदाई का समय आता है। इसीलिए इसे ‘पितृविसर्जनी अमावस्या’, ‘महालय समापन’ या ‘महालय विसर्जन’ भी कहा जाता हैं। अगर कोई श्राद्ध तिथि में किसी कारण से श्राद्ध न कर पाया हो या फिर श्राद्ध की तिथि मालूम न हो तो वह सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है। उन पितरों के लिए भी सर्वपितृ अमावस्याहोती है जिनके बारे में आप नहीं जानते हैं। अत: सभी जाने और अनजाने में पीतरों हेतु इस दिन निश्चित ही श्राद्ध किया जाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सभी पितर आपके द्वार पर उपस्थित हो जाते हैं। 

क्या-क्या करे सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर :

1.पिंडदान करे : पितृ पक्ष में पिंडदान का भी बड़ा महत्व है। सामान्य विधि के मुताबिक पिंडदान में चावल, गाय का दूध, घी, गुड़ और शहद को मिलाकर पिंड बनाए जाते हैं और उन्हें पितरों को अर्पित किया जाता है।

  1. तर्पण करे : पिंडदान के साथ ही जल में काले तिल, जौ, कुशा और सफेद फूल मिलाकर तर्पण किया जाता है। पिंड बनाने के बाद हाथ में कुशा, जौ, काला तिल, अक्षत् व जल लेकर संकल्प ले। इसके पश्चाद इस मंत्र को पढ़े. “ॐ अद्य श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त सर्व सांसारिक सुख-समृद्धि प्राप्ति च वंश-वृद्धि हेतव देवऋषिमनुष्यपितृतर्पणम च अहं करिष्ये।।’
     
  2. ब्राह्मण भोज कराये : पिंडदान और तपर्ण करने के बाद ब्राह्मण भोज करावाया जाता है। ब्राह्मण नहीं हो तो अपने ही कोई रिश्तों के निर्वसनी तथाशाकाहार लोगों को भोजन कराएं।

ये भी करे

  1. शास्त्रों में मृत्यु के बाद और्ध्वदैहिक संस्कार, पिण्डदान, तर्पण, श्राद्ध, एकादशाह, सपिण्डीकरण, अशौचादि निर्णय, कर्म विपाक आदि के द्वारा पापों के विधान का प्रायश्चित लेना कहा गया है।
     
  2. इस श्राद्ध में गोबलि, श्वानबलि, काकबलि तथा देवादिबलि कर्म करें।अंत में चींटियों के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालने के बाद ही भोजन के लिए थाली या पत्ते पर ब्राह्मण हेतु भोजन परोसा जाता है। इस दिन सभी को अच्छे से पेटभर भोजन खिलाकर दक्षिणाब भी दी जाती है।

3.सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने का विधान भी है। सर्वपितृ अमावस्या पर पीपल की सेवा तथा पूजा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। स्टील के लोटे में, दूध, पानी, काले तिल, शहद और जौ मिला ले और उसे पीपल की जड़ में अर्पित कर दें।

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