सतयुग ही नहीं कलयुग में भी मिलती है जीवनदायिनी संजीवनी बूटी, जानिए भारत के किस कोने में मिलता है ये चमत्कारी अमृत !

सतयुग ही नहीं कलयुग में भी मिलती है जीवनदायिनी संजीवनी बूटी !!

हम रामायण में अक्सर ये पढ़ते ही है कि कैसे हनुमान जी ने एक संजीवनी बूटी से लक्ष्मण जी के प्राण बचाये थे । उस समय हनुमान जी को मालूम नहीं था कि उन सब ओषधियों में से संजीवनी बूटी कौन सी है ? इसलिए वो पूरा पर्वत ही उठा कर ले आये । पर क्या आप जानते है कि केवल सतयुग में ही नहीं बल्कि आधुनिक युग में भी एक ऐसी ही संजीवनी बूटी पायी जाती है । अब ये कहाँ पायी जाती है और इसकी तलाश किसने और कैसे की , ये आज हम आपको बताते है ।

बुर्जोई राज की अदभुत खोज ..

दरअसल ईरान के बादशाह बुर्जोई राज खुसरो के प्रधानमंत्री होने के साथ साथ एक चिकित्सक भी थे । वह हमेशा नई औषधियों की खोज करते रहते । साथ ही उन ओषधियों पर लिखे ग्रंथ भी पढ़ते रहते थे । एक बार उन्हें ये पता चला कि भारत में किसी पर्वत पर संजीवनी नाम की एक बूटी होती है । इस बूटी से मृत व्यक्ति भी जीवित हो जाता है । यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति इसे खा ले तो वो हमेशा स्वस्थ और जवान बना रहता है । इस खबर को सुन कर तो मानो बादशाह बुर्जोई उत्साहित और रोमांचित हो उठे । उन्होंने अपने ऊपर जो बादशाह थे उनसे भारत जाने की इजाजत ली । तब वह भारत आए और उस संजीवनी बूटी की खोज करने लगे । इसलिए वह कई पर्वतों और जंगलों में भी गए । लेकिन कहीं पर भी उन्हें संजीवनी बूटी नजर नहीं आई ।

पंचतन्त्र ग्रन्थ से बना अमृत ..

फिर एक दिन वह एक पेड़ की छाया में आराम कर रहे थे । उस समय एक पंडित जी वहां पहुंचे । वह बुर्जोई को देखकर पूछने लगे कि आप परदेसी मालूम होते हैं ।इस पर बुर्जोई ने कहा हां भाई ,मैं परदेसी ही हूं ।तब बुर्जोई ने पंडित जी से पूछा कि मैंने सुना है कि आपके यहां संजीवनी बूटी के रूप में एक अमृत मिलता है । पर मैंने तो यहां बहुत तलाश किया लेकिन वो बूटी मुझे कहीं नजर ही नहीं आई ।यह सब सुनकर पंडित जी हल्के से मुस्कराने लगे और बोले कि संजीवनी बूटी तो केवल हनुमान ही तलाश कर पाए थे ।पर आज के समय में संजीवनी बूटी तो शायद न मिले , लेकिन अमृत जरूर मिल सकता है । हमारे यहां तो अमृत पंचतंत्र नामक ग्रंथ में ही पाया जाता है । जो भी उस ग्रंथ को समझ कर पढ़ लेता है, तो समझ लीजिये वह अमृत पा लेता है । वह पवित्र ग्रंथ जीवन में अमृत घोल देता है । इतना ही नहीं व्यक्ति जब तक जीवित रहता है, वह सकारात्मक विचारों से हमेशा भरा रहता है । ये सुन कर बुर्जोई पंडित जी की बातों से बहुत प्रभावित हुए । वह पंचतंत्र की एक प्रति लेकर ही अपने देश लौट गए ।

इसका मतलब ये हुआ कि इस दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं जो हमेशा के लिए अमर रह सके । पर हां यदि ग्रंथो की वाणी को ग्रहण किया जाये तो वो भी किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं । इससे भले ही आप अमर न हो सके पर आप कभी पाप की राह पर भी नहीं जा पाएंगे । इसलिए आज के समय में तो यही पांच ग्रन्थ सबसे बड़ी संजीवनी बूटी है ।

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