आखिर क्यों साल में एक ही बार खुलता है यह मंदिर :

हिन्दू धर्म में सदियों से नाग देवता की पूजा की परंपरा रही है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नाग को भगवान का आभूषण भजि माना गया है। भारत में नाग देवता के अनेक मंदिर है , जिसमे से एक उज्जैन में स्तिथ नागचंद्रेश्वर का। इस मंदिर की ख़ास बात यह है की यह साल में एक ही बार खुलता है। यह मंदिर नागपंचमी पर खोला जाता है। ऐसा माना जाता है की इस दिन नाग देवता स्वयं मंदिर में मौजूद रहते है। बता दे की इस बार नागपंचमी 19 अगस्त को है तो इस मंदिर के पट 18 अगस्त की रात 12 बजे खुलेंगे तथा 19 अगस्त की रात 12 बजे तक दर्शन होंगे।

क्या है मान्यता :
भगवान शिव को मानाने के लिए सर्पराज तक्षक ने घोर तपस्या करि थी। तपस्या से शिव शंकर प्रसन्न हुए और उन्होंने सर्पो के राजा तक्षक को अमरत्व का वरदान देदिया। ऐसा मन जाता है की उसके बाद से राजा तक्षक ने प्रभु के सानिध्य में ही वास करना शुरू कर दिया।
मान्यताओं के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण राजा भोज ने 1050 ईस्वी के लगभग करवाया था। इसके पश्चाद सीढिया घराने के महाराजा राणोजी सिंधिया ने १७३२ में महाकाल मंदिर का जीणोद्धार कराया था। ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर के दर्शन मात्र से व्यक्ति किसी भी तरह के सर्पदोष से मुक्त होजाता है। हर साल लगभग 2 लाख से ज़ादा लोग नागपंचमी के दिन यह दरसजन करने आते है।

अद्भुत है प्रतिमा :
इस मंदिर में 11वी शताब्दी की एक ऐसी प्रतिमा है जो विश्व में और कही भी नहीं है। यह प्रतिमा ऐसी है जिसमे फैन फैलाये नाग के आसान पर शिव पार्वती बैठे है। ऐसा माना जाता है की यह प्रतिमा उज्जैन से यह लाइ गयी थी। मान्यता है की विश्व में यह एक मात्र मंदिर है जिसमे नाग के आसान पर भगवान विष्णु नहीं भोलेनाथ विराजमान है। मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति में शिवजी , गणेशजी , और माता पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित है।
रात 12 बजे खुलते है पट :
नागपंचमी पर्व पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के शिखर स्तिथ प्राचीन श्री नागचंद्रेश्वर महादेव के मगलवार – बुधवार की मध्य रात 12 बजे पट खोल दिए जाएंगे तथा परंपरा के मुताबिक पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत भगवान नागचन्द्रेश्वार का प्रथम पूजन करेंगे।