अगर करती है पत्नी अपने पति के साथ ऐसा व्यवहार तो मिलती है रावण जैसी ‘अहंकारी संतान’ !! जरुर पढ़ें कहीं आपकी पत्नि ऐसी तो नहीं !!

हिन्दू पौराणिक इतिहास इस बात का गवाह है कि दुनिया भर में लंकापति रावण से बड़ा शिव भक्त नहीं हुआ, जिसकी कठोर तपस्या ने शिवजी को भी उसे वरदान देने के लिए विवश कर दिया था। लेकिन एक असुर में भक्ति की इतनी ललक कैसे थी? कैसे वह एक दैत्य होते हुए भी विद्वानों के गुणों से परिपूर्ण था? दरअसल इसका रहस्य रावण के जन्म से ही जुड़ा है। रावण, एक ऋषि पिता और असुर माता की संतान था। उनके पिता प्रख्यात ऋषि विश्रवा थे लेकिन माता एक असुर थी, जिनका नाम कैकेसी था।

एक ऋषि की संतान होने के बावजूद रावण ने असुर के रूप में क्यों जन्म लिया? क्यों उसका किसी साधारण मनुष्य के रूप में नहीं बल्कि दैत्य के रूप में जन्म हुआ? एक पौराणिक कथा के अनुसार रावण का असुर रूप में जन्म लेना उसकी माता की भूल थी। यदि कैकेसी ने वह भूल ना की होती तो आज रावण को दुनिया दैत्य रावण के नाम से ना जानती।

संयोग से प्रकाण्ड ऋषि विश्रवा का विवाह एक असुर कन्या कैकेसी से हो गया। विवाह पश्चात एक शाम ऋषि पूजा-पाठ में व्यस्त थे। वे तन-मन से अपनी पूजा में लीन थे कि तभी कैकेसी ने उनसे संसर्ग की इच्छा प्रकट की। ऋषि ने इनकार करते हुए कहा कि वो उन्हें पूजा जैसे पवित्र कार्य को करने से ना रोके और धैर्य बनाए रखे। किंतु कैकेसी ने उनकी एक ना सुनी और उनके समक्ष हठ करने लगी। अंतत: ऋषि ने कैकेसी की बात मानी और पूजा कर्म का त्याग कर पत्नी की इच्छा को पूर्ण किया। इसके कुछ महीनों बाद ही रावण का जन्म हुआ।

संतान के रूप में जब कैकेसी ने दैत्य को पाया तो वह निराश हुई। तभी ऋषि ने उसे समझाया कि उसने अपने लालच के लिए उन्हें पूजा जैसे पवित्र कर्म से दूर किया था इसलिए भुगतान हेतु उन्हें ऐसी संतान की प्राप्ति हुई है।

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