दशहरा पर जानिए क्या हुआ था ऐसा की रावण करने लगा था श्री राम की स्तुति..!!!

रामायण में जब श्री राम और रावण के बीच भीषण युद्ध चल रहा था, तब रावण को यह समझ आ गया था की श्री राम जो की भगवान विष्णु के अवतार थे उनको हराना मुश्किल होगा और अब उसकी मृत्यु निश्चित है । इसलिए रावण ने युद्ध के दौरान ही श्री राम की स्तुति करनी चालू कर दी थी । भगवान राम को यह देखकर रावण पर दया आ गयी और उन्होंने सोचा मैं अपने ही भक्त को कैसे मार सकता हूँ और अपना धनुष नीचे कर लिया ।

लेकिन यह देख सभी देवताओं को चिंता होने लगी उनने यह उपाय निकाला की माता सरस्वती रावण की जीभ में विराजमान होकर रावण से श्री राम के लिए कडवे बोल बुलवाएँ और रावण जो श्री राम की स्तुति कर रहा था, न कर पाए।

 

जब माता सरस्वती ने रावण की जीभ पर वास करके उससे श्री राम के लिए कठोर शब्द बुलवाए, तब श्री राम ने क्रोधित होकर अपना धनुष उठाया और रावण को चीर दिया। लेकिन ब्रम्ह देव के द्वारा दिए गए वरदान से रावण फिर उठ खड़ा हुआ।

रावण एक असुर तो था, लेकिन सबसे बड़ा शिव भक्त भी था और माँ भगवती का परम भक्त भी था। एक ऋषि के श्राप के कारण रावण असुर बना।

उसने श्री राम से युद्ध के पहले माँ भगवती की पूजा करके उनसे यह वरदान माँगा था की, “श्री राम से युद्ध के समय माता रावण के साथ उसके रथ पर विराजमान होकर रावण की रक्षा करेंगी” । जब श्री राम ने यह देखा की माता भगवती जो की सम्पूर्ण ब्रम्हांड को जनम देने वाली हैं, जो त्रिदेवों को जनम

देने वाली हैं, रावण के रथ पर विराजमान हैं। ऐसे में रावण पर एक भी प्रहार नहीं किया जा सकता। ऐसे में रावण को मरना असंभव था। इसके लिए श्री राम ने नवरात्र के छटवें दिन माँ दुर्गा की पूजा प्रारंभ की और आठवें दिन माँ दुर्गा प्रकट हुईं और वरदान दिया और नौवें दिन श्री राम ने पूजा ख़तम की। नवरात्र के नौ दिनों के बाद दसवें दिन युद्ध में रावण का अंत किया।

 

 

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