अद्भुत है इस मंदिर की रीत; मन्नत पूरी करने के लिए काट कर चढ़ाई जाती है जीभ..!!!

हमारे देश में अनेक मंदिर है उन्ही मन्दिरों में से आज हम आपके लिए लाये है एक ऐसे अद्भुत मंदिर की कथा जो सुनने में आपको शायद थोड़ा डर भी लग सकता है ऐसा इसलिए क्यूंकि यहाँ इस मंदिर में मन्नत पूरी करने के लिए जीभ काट कर चढ़ाना पड़ती है। हमारे देश में आज भी अंधविश्वास के नाम पर कई प्रथाएं चली आ रही है। भारत में लोगों का भगवान के साथ एक अलग ही रिश्ता हैं। यहां पर लोग भगवान को खुश करने के लिए कुछ भी

रानी तालाब मंदिर
रानी तालाब मंदिर

कर गुजरने को आतुर रहते हैं। एक ऐसी ही अंधविश्वासी प्रथा देखने को मिली मध्यप्रदेश के रीवा जिले में।यहां के कोतवाली थाना क्षेत्र में रानी तालाब मंदिर स्थित हैं।

रीवा के इस मंदिर के बारे में बताया जाता है की यह मंदिर  धर्मप्राण नरेश महाराज भाव सिंह के शासनकाल सन् 1675 में अनेक धार्मिक निर्माण कार्य

हुये जिनमें रानी तालाब के पश्चिमी मेढ़ पर कालिका देवी जी का मनिदर प्रमुख है। इसी मन्दिर से लगा हुआ माँ बगलामुखी का मंदिर हैं। लोगों की मान्यता है, कि दतिया सिद्धपीठ के अलावा केवल रीवा का रानी तालाब ही ऐसी जगह है जहाँ माँ बगलमुखी बिराजी है। रानी तालाब तथा इस मन्दिर का

 मन्नत पूरी करने के लिए जीभ काट कर चढ़ाना पड़ती है
मन्नत पूरी करने के लिए जीभ काट कर चढ़ाना पड़ती है

निर्माण महाराज भाव सिंह की धर्मप्रिय महारानी अजबकुँवरि ने कराया था। देवी मन्दिर रानी तालाब नगरवासियों का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। देवी मन्दिर से भैरों मन्दिर बिछिया भी पहुँचा जा सकता है। देवी मन्दिर में वर्ष में दो बार नवरात्रि के समय मेला गया था। यहाँ दक्षिणमुखी हनुमान जी का मन्दिर दक्षिण दिशा की ओर लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित है।

महारानी अजब कुँवरि ने रानी तालाब का निर्माण सन् 1691 में कराया था। इस तालाब के बीचों-बीच आज भी तीसरी-चौथी सदी का एक शिवालय मौजूद है। इस तालाब के मेड़ पर कालिका देवी का मन्दिर तथा पूर्वी मेड़ पर भैरो जी का मन्दिर है।

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