क्या थी माता कैकयी की भगवान राम को वनवास भेजने की असली वजह..!!!

माता कैकयी के साथ भगवान राम
माता कैकयी के साथ भगवान राम

हम सभी जानते हैं कि कैकयी ने राजा दशरथ से दो वर मांगे जिसके अनुसार राम को 14 वर्षों का वनवास और अपने पुत्र भरत को राज गद्दी।आज हम जानते है ऐसा कैकयी ने क्यों करा ।एक बार राजा दशरथ का मुकाबला बाली से हो गया। जिसमें दशरथ परास्त हो गए। बाली ने दशरथ के सामने शर्त रखी कि पराजय के मोल स्वरूप या तो अपनी रानी कैकेयी छोङ जाओ या फिर रघुकुल की शान अपना मुकुट छोङ जाओ। दशरथ जी ने मुकुट बाली के पास रख छोङा और कैकेयी को लेकर

चले गए।

जब श्री राम जी के राजतिलक का समय आया तब कैकेयी ने रघुकुल की आन को वापस लाने के लिए श्री राम के वनवास का कलंक अपने ऊपर ले लिया और श्री राम को वन भिजवाया। उन्होंने श्री राम से कहा भी था कि बाली से मुकुट वापस लेकर आना है। श्री राम जी ने जब बाली को मारकर गिरा दिया. उसके बाद प्रभु ने बाली से अपने कुल के शान मुकुट के बारे में पूछा, तब बाली ने बताया रावण को मैंने बंदी बनाया था। जब वह भागा तो साथ में छल से वह मुकुट भी लेकर भाग गया। प्रभु मेरे पुत्र को सेवा में ले लें. वह अपने प्राणों की बाजी लगाकर आपका मुकुट लेकर आएगा।

जब अंगद श्री राम जी के दूत बनकर रावण की सभा में गए, वहां उन्होंने सभा में अपने पैर जमा दिए और उपस्थित वीरों को अपना पैर हिलाकर दिखाने की चुनौती दे दी। अंगद की चुनौती के बाद एक-एक करके सभी वीरों ने प्रयास किए परंतु असफल रहे।अंत में रावण अंगद के पैर डिगाने के लिए आया। जैसे ही वह अंगद का पैर हिलाने के लिए झुका, उसका मुकुट गिर गया.अंगद वह मुकुट लेकर चले आए।

कैकयी ने केवल अपने राजधर्म निभाने के लिए ऐसा किया जिसे केवल श्री राम ही समझते थे ।

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