पढ़िए जब नारद मुनि का श्राप बना श्री राम को युद्ध में वानरों का साथ मिलने की वजह..!!!

श्रीराम के जीवनी के पीछे कई सारी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। पुराणिक कथाओं के अनुसार अगर भगवान राम का जन्म रावण वध करने के उद्देश्य से हुआ था। अगर श्रीराम वनवास नहीं जाते तो माता सीता का हरण, भगवान श्रीराम का वियोग रावण वध आदि-आदि ये सबकुछ अधूरा रह जाता। लेकिन ये पढ़ना आपके लिए रोचक होगा कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम को वानरों का साथ मिलने के पीछे भी एक राज़ है, जिसका  रामायण में उल्लेख है। तो आइये आज हम आपको वो पौराणिक कहानी के संदर्भ में बताने जा रहे हैं।

श्री राम और भक्त हनुमान का मिलान
श्री राम और भक्त हनुमान का मिलान

यह तो आप जानते ही है भगवान श्रीराम के वनवास के पीछे माता कैकेयी की जिद को माना जाता है। लेकिन इसे मात्र एक संयोग कहा जा सकता है। इसके अलावा भी कई कारण हैं जिनके कारण राम को वनवास हुआ। दरअसल माता कैकेयी ने हमेशा राम को अपने पुत्र भरत के समान ही प्रेम किया।

कभी भी कैकेयी ने राम के साथ कोई भेद भाव नहीं किया। कैकेयी ने यह जान बुझकर नहीं किया था। कैकेयी से यह काम देवताओं ने करवाया था। यह बात रामचरितमानस में लिखी हुई है। भगवान राम का जन्म रावण वध करने के उद्देश्य से हुआ था। अगर राम राजा बन जाते तो देवी सीता का हरण और इसके बाद रावण वध का उद्देश्य अधूरा रह जाता। इसलिए राम को वन जाना पड़ा।

इसके अलावा जो कारण है उसका संबंध एक श्राप से है। नारद मुनि के मन में एक सुंदर कन्या को देखकर विवाह की इच्छा जगी। नारद मुनि नारायण

वानर राम सेतु का निर्माण करते हुए
वानर राम सेतु का निर्माण करते हुए

के पास पहुंचे और हरि जैसी छवि मांगी। हरि का मतलब विष्णु भी होता है और वानर भी। भगवान ने नारद को वानर मुख दे दिया। इस कारण से नारद मुनि का विवाह नहीं हो पाया। क्रोधित होकर नारद मुनि ने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि आपको देवी लक्ष्मी का वियोग सहना पड़ेगा और वानर की सहायता से ही आपका पुनः मिलन होगा। इस श्राप के कारण राम सीता का वियोग होना था इसलिए भी भगवान राम को वनवास जाना पड़ा।

इसी वजह से भक्त हनुमान से मुलाक़ात हुई जो एक वानर थे और हनुमान ने ही अपने मित्र वानर राज सुग्रीव से मिलवाया जिनके पास वानर की सेना थी। उस समय वानरों में राम के प्रति अगाध श्रद्घा और समर्पण का भाव आ गया था। समर्पण और निष्ठा के कारण कथित रूप से वानर कहे जाने वाले अनार्यों ने रावण की विशाल सेना को पराजित करने में भगवान राम की भरपूर सहयता की।

 

॥जय श्री राम ॥

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