पुत्रदा एकादशी : जानिए कब है पुत्रदा एकादशी , क्यों रखा जाता है ये व्रत और क्या है महत्व !!!

हिन्दू पंचांग के अनुसार 30 जुलाई को एकादशी की तिथि पड़ रही है और इस तिथि को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को रखने से संतान संबंधी परेशानी दूर होजाती है। पौराणिक कथाओ के अनुसार पुत्रदा एकादशी का बहुत महत्व होता है। पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने से श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति होती है। इसलिए इस एकादशी को पुत्रदा एकादशी के के नाम से जाना जाता है ।

पुत्रदा एकादशी व्रत विधि :
हिन्दू पंचांग के मुताबिक़ पुत्रदा एकादशी की तिथि का आरम्भ 30 जुलाई को होगा और इसका पारण 31 जुलाई को किया जाएगा। एकादशी के दिन प्रातः काल में स्नान करे इसके बाद पूजा करे। इस दिन विष्णु जी की पूजा की जाती है। इस दिन घी का दीपक जलाए साथ ही पिली चीज़ो का भोग लगाए क्योकि विष्णु जी को पीले वस्त्र और पीले फूल अति प्रिय है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत के दौरान अन्न का सेवन ना करे। पुत्रदा एकादशी के दिन विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करे क्योकि इस पाठ से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी महत्व :
पुत्रदा एकादशी के व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। सावन महीने की एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। एकादशी व्रत के बारे में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने युदिष्ठिर तथा अर्जुन को बताया था। इस व्रत को रखने से घर में सुख समृद्धि की भी प्राप्ति होती है साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पुत्रदा एकादशी मुहर्त :
पुत्रदा एकादशी व्रत तिथि प्रारम्भ : 30 जुलाई , 2020 को रात 1 बजकर 16 मिनट से।
पुत्रदा एकादशी व्रत तिथि समाप्त : 30 जुलाई , 2020 को दिन 11 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
पुत्रदा एकादशी व्रत पारण : 31 जुलाई , 2020 सुबह 5 बजकर 42 मिनट से रात 8 बजकर 24 मिनट।