अगर आपके घर मे है पूजा स्थल तो रखे इन बातो का खास ध्यान नहीं तो पड़ेगा बाद मे पछताना!!!

घर में पूजा स्थल बनवाते वक़्त ध्यान रखे ये बाते!!!

हमारे जीवन में पूजा-पाठ का अहम स्थान है। चाहे जीवन कितना भी तनाव क्यु ना हो अगर वास्तु के अनुसार बनाया गया पूजा घर या घर में रखा मंदिर, पूरे दिन के तनाव और चिंता को पल भर मे हमसे दूर कर देता है और हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा भी भर देता है। लिहाजा पूजा घर बनवाते वक्त वास्तु के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है

1.घर में पूजा घर ईशान दिशा, अर्थात उत्तर-पूर्व  दिशा में बनाने से सुख-समृद्धि और शांति की वृद्धि होती है। पूजा घर के लिये ईशान (उत्तर-पूर्व) दिशा सबसे सही मानी गयी है। यह दिशा उत्तर व पूर्व दोनों शुभ दिशाओं से युक्त है।

2.घर के पूजा घर में कभी देवी देवताओं की स्थिर प्रतिमा नहीं लगानी चाहिये। गृहस्थ जीवन के लिये यह ठीक नहीं है। आप अपने पूजा घर मे कागज की तस्वीरें व छोटी मूर्तियां लगा सकते हैं।

3.जितना संभव हो घर की रसोई और शयनकक्ष में पूजा घर नहीं बनाना चाहिए। पूजा घऱ क्भी भी रसोई और शयनकक्ष मे ना बनाये अगर आप एसा करते है तो आप खुद ही अपने जीवन मे समस्या उत्पन्न कर रहे है।

4.पूजा घर के ऊपर या नीचे टॉयलेट नहीं होना चाहिए। और यदि संभव हो तो पूजा घर से सटा हुआ भी नहीं होना चाहिए।

5.पूजा घर का आकार पिरामिड जैसा हो तो बहुत ही लाभदायक है। साथ ही इसके दरवाजे स्वयं बन्द व खुलने वाले नहीं होने चाहिये।

6.पूजा घर के अन्दर जूते-चप्पल, झाडू बिल्कुल नहीं होने चाहिए। और किसी भी तरह की खंडित प्रतिमा भी पूजा घर के अंदर नही रखना चाहियें।

7.गणेश जी की प्रतिमा पूर्व या पश्चिम दिशा में न रखकर दक्षिण दिशा में रखें। हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति उत्तर दिशा में स्थापित करें ताकि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर रहे। अन्य देवी-देवताओं के साथ भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति रख सकते हैं।

8.पूजाघर की दीवारों का रंग सफेद या हल्का पीला बेहतर रहता है। पूजाघर में सम्भव हो तो उत्तर या पूर्व की ओर खिड़की अवश्य रखें। दरवाजा भी इसी दिशा में हो तो और अच्छा है।

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