आखिर क्यों पितृपक्ष अशुभ होते हुए भी पुण्यकाल माना जाता है..!!!

इन दिनों श्राद्ध पक्ष चल रहा है अक्सर आपने अपने बड़े बुजुर्गों से सुना होगा श्राद्ध पक्ष शुभ कार्य करने के लिए उचित नहीं होता है। हमारे हिंदू धर्म में पितृपक्ष को अशुभ समय माना जाता है इसलिए इस दौरान कोई शुभ कार्य करने की मनाही है। गीता में लिखा है कि श्रद्धया इदं श्राद्धम् अर्थात् अपने पूर्वजों की आत्मिक संतुष्टि एवं शांति और मृत्यु के बाद उनकी निर्वाध अनन्त यात्रा के लिये पूर्ण श्रद्धा से अर्पित कामना, प्रार्थना, कर्म और प्रयास को श्राद्ध कहा जाता है। इस काल को जीवात्मा के कल्याण के लिये सर्वश्रेष्ठ भी माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान नदी में तर्पण
पितृपक्ष के दौरान नदी में तर्पण

लेकिन क्या आप जानते है आध्यात्मिक दृष्टि से पितृ पक्ष को पुण्यकाल माना जाता है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एक ऐसी अदभुत बेला है, जिसमें मानव न केवल अपने पितरों के प्रति समर्पित होता है बल्कि उनका आशीर्वाद भी पा लेता है। श्राद्ध के दौरान हमारे पितृ यमराज से आज्ञा पाकर धरती पर विचरण करते है इसलिए भी इन दिनों उनकी असीम कृपा पाना आसान हो जाता है और कहा गया है जिस व्यक्ति के पितृ उससे खुश है उस व्यक्ति को कोई दुःख नहीं हो सकता है ।

पितृपक्ष में पिण्डदान
पितृपक्ष में पिण्डदान

आध्यात्मिक दृष्टि  से पितृपक्ष रूह एवं रूहानी और आत्मिक उत्कर्ष का वो पुण्यकाल है, जिसमें कम से कम प्रयास से अधिकाधिक फलों की प्राप्ति सम्भव है। बताया गया है कि श्रवण कुमार का वध राजा दशरथ से भूलवश हो गया था जिससे वह तो शापित हए । परिवार में पितृ दोष के कारण ही बेटों को कष्ट उठाना पड़ा। श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिला। इसी पितृ दोष को दूर करने पर ही मृत परिजनों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होते हैं और आशीष प्रदान करते हैं।पितृ पक्ष के दौरान अपने पितरों को खुश कर अपनी कुंडली के पितृदोष को दूर कर देते है।